Wednesday, October 14, 2020

 बात  होगी तकरीबन  1985-86 की ,

बहन  की शादी  हो गई  थी ,

भाई  IIT में  था ,

मैं  घर  पर  अकेला रह गया था ,

टी  वी  तो था  पर  कोई कब  तक  चौपाल  देख सकता था ,

तभी  दोस्तों  से सुना  कि  VCR  नाम  की कोई चीज  आयी  हैं ...

बस घर  बैठे  बैठे  आराम  से पिक्चर  देखो और मौज  करो ,

Daddy Mummy को  पटाया ,

किस्मत  का  धनी  हूँ  तो पता  चला  कि  हमारे  एक दूर  दराज के  नातेदार  दुबाई  में  निवास  करते  हैं  और  शीघ्र  ही  लखनऊ आने  वाले  हैं ,

उन  से सम्पर्क  साधा  गया और VCR लाने  का  अनुरोध  किया  गया , जल्दी  ही हमारे  यहाँ  VCR आ  गया ...

बहुत  खोजने  के  बाद  लाल बाग  में  Novelty Cinema के  पास  एक Video Cassette की Library भी खोज निकाली  गई ,

खैर  एक नियत  वक़्त  पर  मित्र  मंडली के  साथ  VCR का  श्री गडेश  किया  गया ....

पिक्चर  खत्म हो गई ,

खट  पट  की अवाज  के  साथ  cassette बाहर  निकाला  गया ,

और  एक  Audio cassette की तरह  उसको भी पलट  कर  डालने का  भागिराथी  प्रयास  शुरू  हुआ ....

सोच यहीं  थी  कि  जैसे  audio cassette दोनों  तरफ  से बजता  हैं  वैसे  ही  यह भी चलता  होगा .....

सारे  permutations & combinations अजमा  लिए  गये , पर  अली बाबा  40 चोर  की वोह  गुफा  नहीं  खुलनी  थी  सो  नहीं  खुली ....

बस  जब  थक  हार  कर  हम  सब  बैठ  गये  तो हम  में  से  ही एक  मित्र  ने  एक मोटी  सी  गाली  से हम  सबको  सम्बोधित  करते  हुए  जानकारी  दी  कि  यह  Audio cassette नहीं  हैं ....

जो  दोनों  तरफ से बजेगा ,

बेवकूफो पिक्चर  खत्म  हो गई  और  तुम सब  बेकार  में  मेहनत  कर  रहे  हो ....

हम  सब  खिस्यानी  बिल्ली  से  खम्बा खोजने  लगे , नोचने  के  लिए .....