जीवन में जिस ने आपको माँ बोलना सिखाया या फिर ABCD से परिचित कराया वहीं आपका गुरु हो ऐसा ज़रूरी नहीं ,
जीवन में आये उन गुरु को भी नमन करें ज़िन्होने आपको cigrette का पहला कश लेना सिखाया ,
दारू के संग चखना कितना अहम होता हैँ वोह कांधे पर बड़े प्यार से हाथ रख कर Free में यूँ ही समझाया ....
बालिग होते वक़्त की दुरूह ग्रंथियो को धीरे धीरे बड़े ही प्यार से सुलझाया ....
नमन करता हूँ आज जीवन में आयें ऐसे गुरु लोगों को ज़िन्होने सीटी बजाने की अद्भूत कला से अवगत कराया ,
सीटी कितने प्रकार की होती हैँ यह भी बताया ....
लड़की को देख कर बजाने वाली सीटी ,
जानवरों को देख कर बजाने वाली सीटी
तोते वाली सीटी और भी नाना प्रकार की सीटी ....
तेज गती से चल रही Scooter पर कैसे आगे से पीछे य़ा पीछे से आगे आया जाये यह भी बताने से नहीं चूके ...
किताबी अध्यन तो आप अपनी बढ़ती उम्र और अपने हिसाब से भूल या फिर याद रख सकते हैँ ..
परंतु उपरोक्त फ्री की Knowledge आप चाह कर भी नहीं भूल पायेंगे ....
यह ठीक वैसे ही हैँ जैसे जीवन में cycle चलाना सीखना ,
सीख लिया तो कभी भूले ही नहीं ....
चाहे केचीं चलाई चाहे गद्धी पर ...
इसी लिए कहा गया हैँ कि मित्र से अच्छा कोई गुरु नहीं ....
हर कमीने मित्र को Teacher's day की बधाई...💕💐🙏
Monday, September 4, 2023
Happy Teacher's Day
Thursday, July 13, 2023
यादें ...
बात 1985 की ,
महीना यहीं होगा , July का ...
Intermidiat की परीक्षा बस जैसे तैसे पास कर के ,
Graduation करने के लिए Lucknow University पहुचं गये अपनी लाल रंग की BSA SLR cycle पर ....
उस वक़्त ना तो कोई admission test होता था , ना ही चुनाव की कोई और प्रक्रिया ,
Simple सा एक form भरो और बस लिस्ट निकलने का कुछ दिनों का इंतेजार ....
खैर लिस्ट भी निकली और नाम भी आ गया ...
विषय मिले थे ..
Economics
Psychology
Ancient Indian History
General English
बस अब हर रोज का क्रम बंध गया ,
cycle से 8-10 km की य़ात्रा कर के घर से University तक जाना , shoulder cross bag में चन्द पुस्तक ज़िनका University में कुछ खास उपयोग होता नहीं था ...
बस एक block से दुसरे block , cycle stand ही बदला करते थे ...
Pg block में Economics की classes हुआ करती थी , जो कभी हुई ही नहीं ...
और पुरानी हवेली नुमा ईमारत में Ancient Indian History की ...
Teachers भी शायद इस विषय के लिए पुरतत्व विभाग वालों ने ही दिये थे ...
सब से ज्यादा मनोरांजक विषय था Psychology.....
Seperate Block, बढ़िया Teachers, कुछ अच्छे दोस्त और ढेर सारी गप्पे...
ज़िन्दगी के कुछ खट्टे और कुछ मीठे अनुभव हुए ,
रोज कुछ नए शब्द( गालियां ) सीखने को मिली ....
ज़िनका इस्तेमाल जीवन में कभी भी नहीं किया l
सब से अच्छा अनुभव था जीवन में पहली बार Tagore Library जाना और वहां कुछ वक़्त गुजारना ....
ऊँची छतो वाली वोह ईमारत बहुत ही सुन्दर थी l
खैर इन्ही यादों के साथ कब 2 साल निकल गये , पता ही नहीं चला ....
आज पता चल रहा हैं कि University की चयन प्रक्रिया अब अत्यंत जटिल हो गई हैं ..
अब यह समझ नहीं आ रहा कि शिक्षा का स्तर ऊँचा हुआ हैं य़ा यहां भी जनसंख्या की मार के कारण Admission की पंक्ती लम्बी हो गई हैं ....
खैर जो भी हैं ,
ज़िन्दगी सरल रहें तो ही अच्छी लगती हैं ....
Sunday, June 25, 2023
यूँ तो मेरा जन्मदिन 12 july को होता हैँ ,
पर आज एक मित्र के जन्मदिन और उनकी post से कुछ याद आ गया तो वोह आप सब के संग साँझा करता हूँ ...
बात करीब 70 के दशक की होगी ,
मेरी अवस्था 6 - 7 साल की होगी ,
Daddy ज़िला फारुख्खाबाद के चिकित्सा विभाग के उच्चतम पद पर थे ,
बड़ा बंगला ,
सरकारी गाड़ी ,
नौकर चाकर से भरा पूरा हमारा घर ....
june के महीने से ही 12 july का इंतेजार शुरू हो जाता था ,
समस्त सूविधाओं के होते हुए भी मेहमानों के खान पान की व्यवस्था स्वयं Mummy ही करती थीं ,
एक से एक स्वादिष्ट व्यंजन , मीठा और ना जाने क्या क्या बनाती थी ,
थकना शब्द तो जैसे उनके शब्दकोश में था ही नहीं ,
पर मेरा बालमन इन सब से दूर , शाम को आने वाले उपहारों की गिनती और अनुमानों में ही खोया रहता था ....
शाम होते ही हमारा बड़ा सा बगीचा सज जाता था ,रंग बिरंगी कागज की झांडियो के साथ ,
अब इंतेजार था मेहमानों का ....
धीरे धीरे लोग आना शुरू हो चुके थे ,
सजे धजे ,
हंसी और चहल पहल का माहौल बन चुका था ,
पर यह क्या हर अंकल आंटी खाली हाथ आ रहे थे ,
कोई भी कुछ नहीं ला रहा था ,
हर आने वाले के साथ उम्मीद जागती पर खाली हाथ देख कर दिल मायूस हो जाता ....
इसी ऊह पोह में शाम निकल गई और केक काटने का समय हो गया ,
अब क्या केक काटना जब कुछ मिला ही नहीं ,
दिल बेहद उदास था बस आसूँ नहीं आये वोह अलग बात हैँ ....
छुरी उठा कर केक काटने ही वाला था तभी Daddy के Junior शायद उनका नाम Dr . Homdutt Gupta था , भारी भरकम शरीर के मालिक आगे आये और मेरा हाथ पकड़ कर , एक प्यारी सी हाथ घड़ी उस में बांध दी ....
मेरे जीवन की पहली हाथ घड़ी ,
सब Doctors की तरफ से एक प्यारा सा उपहार था ....
बाद में पता चला कि उस वक़्त उसकी कीमत ₹ 200/- के करीब थी ...
खैर उपहार उपहार होता हैँ ,
उसकी कीमत नहीं आंकी जानी चाहिए ....
बस उस दिन से आज तक मैनें घड़ी की चाल से अपनी चाल मिला ली और हो गया मैँ वक़्त का पाबन्द इंसान ....
Thursday, June 22, 2023
इस बार चाह कर भी Daddy के लिए कुछ नहीं लिख पाया ,
मन ही नहीं हुआ ....
विचार दिमाग में ही कैद रहें ,
कोई तस्वीर बाहर निकल कर नहीं आयी ....
बस आया तो उनकी यादों का सैलाब ,
उनके संग बिताये वोह आखिरी पल , जब उनकी खत्म होती हुई सांसों को उनके सिरहाने बैठ कर गिन रहा था ....
एक एक छवी आज भी दिमाग में हैं ...
बस जुबां खामोश हैं ...
खैर , ना तो कुछ लिखा ना बाकी सब की तरह उनकी तस्वीर ही लगाई ...
लगाई तो पिता पुत्र का एक चित्र , जो ना जाने कितने साल पहले बनाया था ....
जो पिता की कथा स्वयं व्यक्त कर रहा हैं ....
पिता का साया हैं तो हम कितने मस्त हैं ...
पैर हवा में हैं ...
और हाथ में हैं , जीवन की रंग बिरंगी खुशियां ....
Monday, May 29, 2023
कहीं कुछ पढ़ा और Daddy फिर यादों का दरवाजा खट खटा गये ,
कहीं बाहर जाता तो जाने से पहले Daddy के पास आता ,
बूढी पड़ गई ज़र्जर काया को बाहों में लेता ,ढ़ीले ढ़ाले कुर्ते में उनके शरीर को ढूंढ पाना भी मुशकिल ही होता ....
खैर फिर भी उनको महसूस करता और धीरे से उनके कान के पास फुसफुसा कर कहता ,
Daddy, जा रहा हूँ अपना ध्यान रखियेगा और Mummy का कहना मानियेगा और हाँ , लड़ीयेगा नहीं ,
कभी समस्त प्रदेश का Director General of Medical & Health of Uttar Pradesh रहा व्यक्ति चुप चाप मेरी बात सुनता और सहमती में सर झुका कर मुझे आश्वासित कर देता कि वोह वैसा ही करेंगे जैसा मैने कहाँ हैं ....
खैर अब तो यादों और उस कुर्ते के अलावा कुछ रहा नहीं पर उस एहसास की गर्मी और अपनापन आज भी महसूस होता हैं ....
#memorydownlane
Saturday, February 4, 2023
#worldcancerday2023
#WorldCancerDay2023
बहुत छोटा था तब में ,
शायद बात 1980 के करीब की होगी
Mummy के चाचा जी के बेटे ,
और हमारे निरांकार मामा ....
लम्बा पतला दुबला शरीर ,
सांवला रंग ,
तीखे नाक नक्ष ...
गीत संगीत के दीवाने ,
एक पुराना गाना ,
तस्वीर बनाता हूँ , तस्वीर नहीं बनती ....
बड़े ही जतन से गाते थे ,
हमारे लखनऊ प्रवास के दौरान एक दिन मामाजी लखनऊ आये और चूँकी पिता जी , एक डॉक्टर थे , और मामा जी का स्वास्थ ठीक नहीं था ,
अत: जांच के दौरान पता चला कि मामा जी को Cancer हैं और उपचार का वक़्त निकल गया हैं ....
यह थी इस भीषड़ बीमारी से मेरी पहली मुलाकात ....
फिर शुरू हुआ ईलाज का कभी ना खत्म होने वाला सफर ,सांवली देह काली हो चुकी थी ,
मामा जी की पीड़ा कानो को भेद देती थी , एक अत्यंत सौमय व्यक्ति किस प्रकार तिल तिल कर के मौत के समीप जा रहा था ,
आज भी सोचता हूँ तो कांप सा जाता हूँ ....
खैर काल की गती को कौन रोक पाया हैं ,वोह वक़्त भी आ ही गया जब मामा जी अपने सारे भौतिक कष्टों से मुक्ती पा कर , उस परम पिता में लीन हो गये ....
उनका प्रिये गाना जैसे आज भी उनके अधूरे जीवन की कहानी सुनाता हुआ कह रहा हैं ....
तस्वीर बनाता हूँ ,
तस्वीर नहीं बनती ,
एक ख्वाब सा देखा हैं ,
ताबीर नहीं बनती .....

