Monday, September 4, 2023

Happy Teacher's Day


 

जीवन में  जिस  ने आपको  माँ  बोलना  सिखाया  या  फिर ABCD  से परिचित  कराया वहीं  आपका  गुरु  हो ऐसा  ज़रूरी  नहीं ,
जीवन  में  आये  उन  गुरु  को भी नमन  करें  ज़िन्होने  आपको  cigrette  का  पहला  कश  लेना  सिखाया ,
दारू  के संग  चखना कितना  अहम  होता  हैँ  वोह कांधे  पर  बड़े  प्यार  से हाथ  रख  कर Free में  यूँ  ही समझाया ....
बालिग  होते  वक़्त  की  दुरूह  ग्रंथियो  को  धीरे  धीरे  बड़े  ही प्यार  से सुलझाया ....
नमन  करता  हूँ  आज    जीवन  में आयें ऐसे   गुरु  लोगों  को  ज़िन्होने  सीटी  बजाने  की  अद्भूत  कला  से अवगत कराया ,
सीटी  कितने  प्रकार  की  होती  हैँ  यह भी बताया ....
लड़की को  देख  कर  बजाने  वाली  सीटी ,
जानवरों  को  देख  कर  बजाने  वाली सीटी
तोते  वाली  सीटी  और  भी नाना  प्रकार  की सीटी ....
तेज  गती  से  चल  रही  Scooter  पर  कैसे  आगे  से  पीछे  य़ा  पीछे  से आगे आया  जाये  यह भी  बताने  से नहीं  चूके ...
किताबी अध्यन  तो आप  अपनी  बढ़ती  उम्र  और  अपने    हिसाब  से भूल  या  फिर याद  रख  सकते  हैँ ..
परंतु  उपरोक्त फ्री की Knowledge आप  चाह  कर  भी नहीं भूल  पायेंगे ....
यह  ठीक  वैसे  ही हैँ  जैसे  जीवन  में  cycle  चलाना  सीखना ,
सीख  लिया  तो कभी  भूले  ही  नहीं ....
चाहे केचीं   चलाई चाहे गद्धी  पर ...
इसी  लिए कहा  गया  हैँ  कि  मित्र  से अच्छा  कोई गुरु नहीं ....
हर  कमीने  मित्र  को  Teacher's day की  बधाई...💕💐🙏

Thursday, July 13, 2023


 यादें ...

बात  1985 की ,

महीना यहीं  होगा , July का ...

Intermidiat की  परीक्षा बस जैसे तैसे  पास  कर  के ,

Graduation करने  के लिए  Lucknow University पहुचं  गये  अपनी  लाल  रंग  की BSA SLR cycle पर ....

उस  वक़्त  ना  तो कोई admission test होता  था , ना  ही  चुनाव  की  कोई और  प्रक्रिया ,

Simple सा  एक form भरो और  बस  लिस्ट  निकलने  का  कुछ दिनों  का  इंतेजार ....

खैर  लिस्ट  भी  निकली  और  नाम  भी आ गया ...

विषय  मिले  थे ..

Economics

Psychology

Ancient Indian History

General English

बस  अब हर  रोज का  क्रम  बंध  गया ,

cycle से  8-10 km  की य़ात्रा  कर  के घर से  University तक  जाना , shoulder cross bag में  चन्द  पुस्तक  ज़िनका  University में  कुछ  खास  उपयोग  होता  नहीं था ...

बस  एक block से दुसरे  block , cycle stand ही बदला  करते  थे  ...

Pg block में  Economics की  classes हुआ  करती  थी , जो कभी हुई  ही नहीं ...

और  पुरानी  हवेली नुमा  ईमारत  में Ancient Indian History की ...

Teachers भी शायद  इस  विषय  के  लिए पुरतत्व विभाग  वालों  ने  ही  दिये थे ...

सब  से ज्यादा  मनोरांजक विषय  था  Psychology.....

Seperate Block, बढ़िया  Teachers, कुछ अच्छे  दोस्त और  ढेर  सारी  गप्पे...

ज़िन्दगी  के कुछ खट्टे और  कुछ  मीठे  अनुभव  हुए ,

रोज  कुछ नए  शब्द( गालियां ) सीखने  को मिली ....

ज़िनका  इस्तेमाल  जीवन  में  कभी भी नहीं किया l

सब  से अच्छा  अनुभव  था  जीवन  में  पहली बार  Tagore Library  जाना  और  वहां  कुछ वक़्त  गुजारना ....

ऊँची  छतो वाली  वोह  ईमारत  बहुत  ही सुन्दर  थी l

खैर  इन्ही यादों  के  साथ  कब  2 साल निकल  गये , पता  ही नहीं  चला ....

आज  पता  चल  रहा  हैं  कि  University की  चयन प्रक्रिया  अब  अत्यंत  जटिल  हो  गई  हैं ..

अब  यह समझ नहीं  आ रहा  कि  शिक्षा  का  स्तर  ऊँचा  हुआ  हैं य़ा  यहां  भी  जनसंख्या की  मार  के कारण Admission की  पंक्ती  लम्बी  हो गई  हैं ....

खैर  जो  भी  हैं ,

ज़िन्दगी  सरल रहें  तो ही  अच्छी  लगती  हैं ....

Sunday, June 25, 2023

 यूँ तो मेरा जन्मदिन  12 july  को होता हैँ ,

पर  आज  एक  मित्र  के जन्मदिन और  उनकी  post  से कुछ  याद  आ  गया  तो वोह  आप  सब  के संग  साँझा  करता  हूँ ...

बात  करीब  70 के दशक की होगी ,

मेरी अवस्था  6 - 7 साल  की होगी ,

Daddy  ज़िला  फारुख्खाबाद  के चिकित्सा  विभाग के उच्चतम पद  पर थे ,

बड़ा  बंगला ,

सरकारी  गाड़ी ,

नौकर चाकर  से भरा  पूरा  हमारा  घर ....

june  के महीने  से ही 12 july  का इंतेजार  शुरू  हो जाता  था ,

समस्त  सूविधाओं  के होते हुए भी मेहमानों  के खान  पान  की व्यवस्था  स्वयं  Mummy  ही करती  थीं ,

एक  से एक  स्वादिष्ट  व्यंजन , मीठा  और  ना  जाने  क्या  क्या  बनाती  थी ,

थकना  शब्द  तो जैसे  उनके  शब्दकोश  में  था  ही नहीं ,

पर मेरा बालमन इन  सब  से दूर , शाम  को आने वाले  उपहारों  की गिनती और  अनुमानों  में  ही खोया  रहता  था ....

शाम  होते ही हमारा  बड़ा  सा  बगीचा सज जाता  था ,रंग बिरंगी  कागज  की  झांडियो के  साथ ,

अब  इंतेजार  था मेहमानों  का ....

धीरे  धीरे  लोग आना  शुरू हो चुके थे ,

सजे  धजे ,

हंसी और  चहल पहल  का  माहौल  बन चुका था ,

पर  यह क्या  हर  अंकल  आंटी  खाली  हाथ आ  रहे  थे ,

कोई भी कुछ नहीं ला  रहा  था ,

हर  आने  वाले  के  साथ  उम्मीद  जागती  पर  खाली  हाथ देख कर  दिल मायूस  हो जाता ....

इसी  ऊह  पोह  में  शाम  निकल  गई  और  केक  काटने  का  समय  हो  गया ,

अब क्या  केक  काटना  जब  कुछ मिला ही नहीं ,

दिल बेहद उदास  था  बस आसूँ  नहीं आये वोह अलग  बात  हैँ ....

छुरी  उठा  कर केक  काटने  ही वाला था  तभी Daddy  के Junior  शायद  उनका  नाम  Dr . Homdutt  Gupta  था , भारी  भरकम शरीर के  मालिक  आगे  आये और  मेरा  हाथ  पकड़  कर , एक प्यारी  सी हाथ  घड़ी  उस  में  बांध  दी ....

मेरे जीवन की पहली  हाथ  घड़ी ,

सब  Doctors  की  तरफ  से एक प्यारा  सा  उपहार  था ....

बाद  में  पता  चला  कि  उस  वक़्त  उसकी  कीमत  ₹ 200/- के  करीब  थी ...

खैर  उपहार  उपहार  होता हैँ ,

उसकी  कीमत  नहीं  आंकी  जानी  चाहिए ....

बस  उस  दिन से आज  तक  मैनें  घड़ी  की  चाल  से अपनी  चाल  मिला  ली  और  हो गया  मैँ  वक़्त  का  पाबन्द इंसान ....

Thursday, June 22, 2023

 इस  बार  चाह  कर  भी Daddy के  लिए  कुछ  नहीं  लिख  पाया ,

मन  ही नहीं  हुआ ....

विचार  दिमाग  में  ही  कैद  रहें ,

कोई तस्वीर  बाहर  निकल  कर  नहीं  आयी ....

बस  आया  तो उनकी  यादों  का  सैलाब ,

उनके  संग  बिताये  वोह  आखिरी  पल , जब  उनकी  खत्म  होती  हुई  सांसों  को  उनके  सिरहाने  बैठ  कर  गिन  रहा  था ....

एक  एक  छवी  आज  भी दिमाग  में  हैं ...

बस  जुबां  खामोश  हैं ...

खैर , ना  तो कुछ लिखा  ना  बाकी  सब  की  तरह  उनकी  तस्वीर  ही लगाई ...

लगाई  तो पिता  पुत्र  का  एक चित्र  , जो ना  जाने  कितने  साल  पहले  बनाया  था ....

जो पिता  की  कथा  स्वयं  व्यक्त  कर  रहा  हैं ....

पिता  का  साया  हैं  तो हम  कितने  मस्त  हैं ...

पैर  हवा  में  हैं ...

और  हाथ  में  हैं  , जीवन  की  रंग बिरंगी खुशियां ....

Monday, May 29, 2023

 कहीं  कुछ पढ़ा  और  Daddy फिर  यादों  का  दरवाजा खट  खटा गये ,

कहीं बाहर जाता तो जाने से  पहले Daddy के पास आता ,

बूढी पड़ गई ज़र्जर काया को बाहों में लेता ,ढ़ीले ढ़ाले कुर्ते में उनके शरीर को ढूंढ पाना भी मुशकिल ही होता ....

खैर  फिर  भी उनको महसूस करता और धीरे से उनके कान के पास फुसफुसा कर कहता ,

Daddy, जा रहा हूँ अपना ध्यान रखियेगा और Mummy का कहना मानियेगा और  हाँ , लड़ीयेगा नहीं ,

कभी समस्त प्रदेश का Director General of Medical & Health of Uttar Pradesh रहा व्यक्ति चुप चाप मेरी बात सुनता और सहमती में सर झुका कर मुझे आश्वासित कर देता कि वोह वैसा ही करेंगे जैसा मैने कहाँ हैं ....

खैर अब  तो यादों और उस कुर्ते के अलावा कुछ रहा नहीं पर उस  एहसास  की गर्मी और अपनापन आज भी महसूस होता हैं ....

#memorydownlane

Saturday, February 4, 2023

#worldcancerday2023

 #WorldCancerDay2023 

बहुत छोटा था तब में ,

शायद बात 1980 के करीब की होगी 

Mummy के चाचा जी  के बेटे ,

और हमारे निरांकार मामा ....

लम्बा पतला दुबला शरीर ,

सांवला रंग ,

तीखे  नाक नक्ष ...

गीत संगीत के दीवाने ,

एक  पुराना  गाना ,

तस्वीर बनाता हूँ , तस्वीर नहीं बनती ....

बड़े ही जतन से गाते थे ,

हमारे लखनऊ प्रवास के दौरान एक दिन मामाजी लखनऊ आये और चूँकी पिता जी , एक डॉक्टर थे , और मामा जी का  स्वास्थ ठीक नहीं था ,

अत: जांच के दौरान पता चला कि मामा जी को Cancer हैं और  उपचार  का  वक़्त निकल  गया हैं ....

यह थी इस  भीषड़  बीमारी से मेरी पहली मुलाकात ....

फिर  शुरू हुआ ईलाज  का  कभी ना खत्म होने वाला सफर ,सांवली देह काली हो  चुकी थी ,

मामा  जी  की पीड़ा कानो को भेद देती थी , एक अत्यंत सौमय व्यक्ति किस प्रकार तिल तिल कर के मौत के समीप जा रहा था ,

आज भी सोचता हूँ तो कांप सा जाता हूँ ....

खैर काल की गती को कौन रोक पाया हैं ,वोह वक़्त भी आ ही गया जब मामा जी अपने सारे भौतिक कष्टों से मुक्ती पा कर , उस परम पिता  में लीन हो गये ....

उनका प्रिये गाना जैसे  आज भी उनके अधूरे जीवन की कहानी सुनाता हुआ कह रहा हैं ....

तस्वीर बनाता हूँ ,

तस्वीर नहीं बनती ,

एक ख्वाब सा देखा हैं ,

ताबीर नहीं बनती .....