Sunday, November 20, 2022

Down memory lane


 बहुत दिनों  बाद  आज दिल कुछ उदास  सा हैं ,

यादें  घूमड़  रहीं  हैं ,

यूँ  ही आज  "सूई  धागा " हिन्दी  चलचित्र  देखा ,

एक Scene में  बेटा  बहुत ज्यादा  भावुक  हो कर  अपने  पिता  के गले लग जाता  हैं ,

बस यहीं  मैं  भी यादों  की हवेली का दरवाजा खोल  कर  भीतर  दाखिल  हो गया ....

यूँ  तो कभी याद नहीं  कि  Daddy ने मुझे गले लगाया  हो , पर  अपने  अंतिम  दिनों  में  जब वोह मेरे ज्यादा करीब  हो गये  थे , तो जब कभी भी मैँ  कहीं बाहर  जाता  तो उनका  जर्जर होता  ज़िस्म  अपनी  बांहो  में  भरता  और  उनको समझाता  कि  Daddy मैँ  जा  रहा हूँ ,

अपना  ध्यान  रखियेगा  और  Mummy की सारी  बातें  मानियेगा ,

किसी  अच्छे बच्चें  की तरह  वोह मेरी बांहो  में सिमट  जाते  और  सहमति में सर  झुका  कर , सर  नीचे  कर  लेते .....

आज  बस उस  पल का  एहसास  रह  गया  हैं I

Daddy जो नहीं रहें....

Tuesday, May 24, 2022

60-65 वर्ष का साथ , Doctor के कहते ही , She is not anymore , एक ही पल में समाप्त हो गया .... खबर मिलते ही घर मेहमानों और रिश्ते नाते के तमाम लोगों से भर गया , दादा जी एकदम चुप से हो गये थे, चुप और गुमसुम , रस्म रिवाजों का लम्बा सिलसिला चला और अतंत: दादी की एक हसंती मुस्कुराती तस्वीर चन्दन के हार के साथ दीवार की शोभा बन गई , दादा जी का समस्त अस्तित्व एक सफेद कुर्ते पजामे में समा गया .... धीरे धीरे सब समान्य होता जा रहा था .... बस दादा जी की उदासी और दीवार पर लटकी दादी की हंस्ती हुई तस्वीर की उदासी नहीं जा रहीं थी , दिन , सप्ताह , महीने गुज़र गये .... मौसम बदला और एक दिन घनघोर काले बादलों के साथ मुसलाधार बारिश होने लगी , दादा जी यूँ ही अनमने मन से कभी बादलों को देखते और कभी बारिश में भीगते अपने पेड़ पौधों को जिनको कभी बड़े ही चाव से लगाया था .... इतने में ही ना जाने कहाँ से एक कुत्ते का छोटा सा बच्चा बारिश से बचने के लिए दादा जी के घर में घूस आया और कूँ कूँ करता दादा जी के पैरों के पास आ कर बैठ गया ... कभी दादा जी के पैरों को चाटता कभी उनकी तरफ देखता .... लाख दादा जी के उसको बाहर करने के प्रयास विफल हो गये , वोह जैसे उस घर को अपना मान चुका था , कई दिन तक वोह घर के अंदर प्रवेश ना पा सका हाँ पर वक़्त से भोजन जरूर पा जाता था .... अंत में थक हार कर विजय कुत्ते के बच्चे की ही हुई और दादा जी ने हथियार डाल कर उसको अपना लिया ... भोर की पहली किरन के साथ दादा जी के घर का दरवाजा खुला , और दादा जी अपने नये साथी के साथ महिनों बाद एक बार फिर Morning Walk पर जाने के लिए अपने gate से बाहर निकाल आयें .... दादी आज वाकई तस्वीर से निकल कर मुस्कुराती हुई सी लगीं ....

Sunday, May 15, 2022

काशी..... जब कुछ लिखने बैठा था तब सोचा था कि चंद यादे ही तो शब्दों के माध्यम से पिरोनी है ,पिरो लूँगा.... पर यह कार्य इतना दुष्कर और जटिल हो जायेगा इसका मुझे लेशमात्र भी ज्ञान नहीं था। काशी ....शिव की नगरी ,जो अब श्री नरेंद्र मोदी की नगरी हो गई है ,बदली हुई राजनैतिक परिस्थितयों में ,यहाँ के लोगो को शायद शिव से इतनी उम्मीदे नहीं होंगी जितनी अब श्री मोदी से है ,खैर विषय को राजनैतिक न बनाते हुए फेसबुकिया ही रखते हैं ,हल्का फुल्का ,बनारसी चुहलबाजी से भरपूर। फरवरी 2007 मैं मैंने पहली बार इस 3000 वर्ष से भी प्राचीन नगरी में अपने चित्रो की प्रदर्शनी करने का सौभाग्य पाया था ,यात्रा और अनुभव अच्छा रहा था पर मन में एक कसक रह गई थी कि गंगा आरती नहीं देख पाया , सो इस बार ठान कर निकला था कि चाहे कुछ भी हो जाये गंगा आरती का तो सुख ले कर ही रहूँगा... आभारी हूँ वहां के मेरे मित्रो का जिन्होंने इस अद्भुत दृश्य और अनुभूति से मेरा परिचय कराया ,हज़ारों की भीड़ पर जर्रा भर भी कलरव नहीं ..... वातावरण में था तो बस मंत्रो की गूँज और लोबान का महकता हुआ धुआँ ..... जो हम सब को एक ओंकार से जोड़ रहा था … कुछ अनुभूतियाँ शब्दों में व्यक्त नहीं की जा सकती ,उस के लिए आप को एक बार बनारस के उन घाटो पर जाना ही पड़ेगा ,और यकीन मानिए सौदा घाटे का नहीं रहेगा। यूँ तो इतनी यादे ले कर लौटा हूँ कि बनारस के १०० घाटो से भी ज्यादा पन्नें भर सकता हूँ ,पर कुछ चुटीले और कुछ दार्शनिक अनुभव ही साँझा करूँगा , घाट किनारे जब माथा भर भर के तिलक लगते पंडितो को देख कर मैं अपने दिल पर काबू नहीं कर पाया तो मैं भी एक बनारसी गोल छतरी के नीचे बैठे पंडित के पास बैठ गया और आग्रह किया कि माथा भर कर सुन्दर सा तिलक सजा दे ,एक मित्र के टिप्पडी करने पर कि ऐसा टीका लगाना पंडित जी कि इस के पाप धूल जाये ,ख़ास बनारसी अंदाज़ में चुहलबाज़ी करते हुए पंडित जी अत्यंत कुटिलता से बोले की ..... अरे बबुआ पाप न करीं तो बाप कइसन बनी। कहना व्यर्थ होगा की वह एक जोर का ठाहका गूँज उठा .... इसी प्रकार मेरे एक मित्र के आग्रह पर जब हम सब उत्तपम खाने एक बेहद सरल से दिखने वाले व्यक्ति के पास गए जिस के हाथो में स्वयं माँ अन्नपूर्णा का वास था ,इतना स्वादिष्ट उत्त्पटम् आप किसी महंगे से महंगे दामी भोजनालय में भी नहीं पाएंगे ऐसी मेरी गारंटी हैं ,खैर उत्तपम पर्व खत्म हुआ, चलते चलते सोचा की तारीफ कर दे और धन्यवाद दे दे , इस पर उस सज्जन व्यक्ति ने इतनी दार्शनिक बात कह डाली की सुन कर उस के आत्मिक ज्ञान एहसास हो गया ... बाबू जी यह मेरे लिए उत्तपम नहीं है ,यह मेरे लिए मेरे परिवार का भविष्य है और मैं अपने परिवार के भविष्य के संग खिलवाड़ और बेईमानी कैसे करुँ , पूरी ईमानदारी से काम करता हूँ बाकि भगवान् की मर्ज़ी .... अंत करना चाहूंगा इस यात्रा का पर संभव नहीं हो पायेगा क्यूंकी मेरे कलाकार अस्तित्व का एक भाग अभी भी गंगा मैया के पावन जल में डुबकी लगा लगा कर वही किसी घाट के कोने में शिव की भांग में मद मस्त हो कर झूम रहा है.... ( Painting is done by knife on paper with some collage work).

Sunday, May 8, 2022

वोह खत जो कभी लिखा ही नहीं .... किसको लिखता वोह सब जो मैँ चाहता तो था पर कभी हुआ ही नहीं , कौन था जो वोह सब समझता जो मैं लिखता , बिना मुझे समझाये बस मुझे समझता , वोह सब पढ़ता जो मैं केवल उसके लिए लिखता , सुनो , अगर मैं बोलता तो वोह बस सुनता .... अगर मैँ दिल खोलता तो वोह दिमाग नहीं खोलता .... अगर खत में मुस्कान होती तो वोह भी खिलखिलाता , और अगर आंसू होते तो वोह अपना कांधा देता .... पर यह सब बस ख्याल ही रहें , इसी लिए , यहीं वोह खत हैं जो मैनें कभी किसीको लिखा ही नहीं .....❤️❤️

Wednesday, April 20, 2022

Stand up Comedy

हँसना और वोह भी जोर जोर से हँसना, सेहत के लिए लाभकारी और आवश्यक हैं , परंतु वहीं प्यारी सी हंसी किसी बेबात या बेतुकी , भोंडेपन की चाद्दर ओढ़े नज़र आये तो वोह कहाँ तक सही हैं ,कई दिनों से देख रहा हूँ , Stand-up comedy के नाम पर होता हुआ शब्दों का नंगा नाच , ज़िसको हमारी युवा पीढ़ी बड़े ही मज़े लें लें कर देख रहीं हैं , कोई भी सीमा नहीं हैं , गाली , शरीर का हर वोह अंग ज़िसको हम सब छुपा कर रखते हैं , बेहुदेपन से उसका ज़िक्र करना , संभोग के नाना पर्यावाची शब्दों का करतल ध्वनी के साथ मंच पर प्रयोग करना , और हर वोह बात करना जो YouTube पर उनके likes तो बढ़वायेगा ही , साथ ही साथ उनकी जेब भी भर देगा , अब सवाल हैं कि क्या प्रसिद्ध होने के लिए विवादास्पद होना ज़रूरी हैं , क्या हम स्वस्थ मनोरंजन के ज़रिये कामयाबी नहीं हासिल कर सकते , भूत में जाये तो कितने ही मसखरे ऐसे हुए हैं ज़िन्होने कभी भी इन अपवादों का सहारा नहीं लिया और कामयाबी के शिखर तक पहुचें .... फिर कमी कहाँ हैं , हमारे गिरते बौद्धिक स्तर की , भटकते हुए हमारे आज के युवाओं की , य़ा फिर खुद हमारी जो हम बच्चों को Class और Crass का अंतर नहीं समझा पायें ....

Thursday, March 31, 2022

"मसाला चाय "

"मसाला चाय ".... दिव्य प्रकाश द्वारा लिखी गई उनकी दूसरी पुस्तक ने मुझे मेरी युवावस्था के उस ड्योढ़ी पर लाकर खड़ा कर दिया जो मैं कब कि लांघ चुका था। अभी एक ही कहानी पढ़ी है ..... केवल बालिगों के लिये .... इस कहानी ने मुझे मेरे जीवन के 2 संस्मरण याद दिलाये .... 1,जब हम 3 मित्रो ने, जिनका नाम अमित नारायण एवं रवि किशन था ,अपने कॉलेज से भाग कर blue lagoon देखी थी ... अमित नारायण ,गहरे काले रंग का किशोरावस्था में कदम रखता बालक था जिस के बाल अमिताभ बच्चन cut में कटे हुए थे और वोह अमीनाबाद में कही रहता था ,रवि किशन हमारी कक्षा का सब से हॅसमुख लड़का था आज इतने सालो बाद भी उसका वही हँसता हुआ चेहरा आँखों के आगे आता हैं ... चूँकि हम तीनों शरीर से हट्टे कट्टे और कद में ऊँचे थे तब हम गेट पर पकड़ लिए जायेंगे ऐसी कोई भावना हमारे अंदर नहीं थी ,सो बस तय दिन के अनुसार हम तीनों महशूर सिनेमा घर बसंत जो कि हज़रत गंज में हुआ करता है,पहुँच गये ,हाँ इतना याद है कि सर्दियों के दिन थे और हम तीनो अपने अपने blue blazers कि शोभा बढ़ाते हुए टिकट खिड़की पर खड़े थे .... चुकी अमित हम सब में , से ज्यादा परिपक्व था और उस के लिए शायद यह पहला मौका भी नहीं था अतः हम दोनों उस के निर्देशानुसार ही आचरण कर रहे थे ,दिल में धुकधुकी तब तक रही जब तक हम टिकट लेकर उस काले गहरे सिनेमा हॉल के कक्ष में 3 काली परछाइयो से समां नहीं गये .... अब पिक्चर को देख कर 3 जवान होते लड़को ने कैसा महसूस किया होगा इस का वर्णन करना आवश्यक नहीं हैं ... दूसरा संस्मरण तब का है जब हम तीनो भाई बहन अपनी मम्मी के साथ ३ रसिक बुड्ढो कि कहानी फ़िल्म शौक़ीन देखने गए थे चुकी फ़िल्म बालिग थी और भीड़ कुछ ज्यादा ही थी अतः गेट कीपर ने सुरक्षा के मद्दे नज़र महिलाओ और लड़कियो से कहा कि वोह लोग गेट के अंदर वाले हॉल मैं आ जाये .... स्थिति तब हास्यपद हो गई जब हमारी मम्मी ने गेट कीपर से आग्रह किया कि चूकें हम दोनों भाई अभी बच्चें है इस लिए हम दोनों को भी अंदर आने दिया जाये ....

Wednesday, March 30, 2022

Behuman

मेरा भांजा , उम्र होगी लगभग 5-6 साल , बेहद प्यारा और खूबसूरत बच्चा , काली काली हिरन सी चमकती आँखे और सुन्दर रेशम जैसे बाल , खूब मज़े से खेल रहा था तभी हमारा परम प्रिय सेवक बहादुर , एक बेहद फुर्तीला और समझदार नेपाली जो ना जाने कितने ही वर्षों से हमारे घर की डोर संभाले हुए था , गर्म पानी का बर्तन लें कर निकला और पानी भी खौलता हुआ , और वोह भागते हुए बच्चे से टकरा गया और पूरा का पूरा पानी उस नाजुक देह को लाल करता हुआ, कई दिनों तक ना मिटने वाला दर्द और जख्म दे गया , पूरे देह पर फफोले से आ गये थे , जो कई साल रहें , उसका दर्द देखा नहीं जाता था तो मुंह छुपा कर रो लेता था , एक नामी Missionary स्कूल में पढ़ता था वोह , Exams चल रहे थे , Principal ने साफ इंकार कर दिया कि बिना exam दिये बच्चे को पास नहीं किया जा सकता , किस तरह उसको चादर से ढ़क कर मैं उसको लें कर गया था और कैसे उसकी दर्मियाने कद की टीचर उसको देख कर सहम गई थी आज भी याद हैं .... खैर इस सब के बीच एक अच्छा एहसास भी हुआ , तब विकास नगर में बिजली बहुत जाती थी , पूरी पूरी रात हाथ वाले पंखे क साथ गुज़र जाती थी , उस वक़्त inverter भी नहीं हुआ करता था , गर्मी के दिन और झुलसा हुआ बदन , बच्चा बेहद य़ातना और पीड़ा में था , बिजली हम सब से नाता तोड़ कर जा चुकी थी , खैर Power House वालो को सम्पर्क किया तो एक व्यक्ति ज़िसका नाम मुन्ना था और इस्लाम धर्म को मानने वाला था , रात के अंधेरे में किसी देवदूत की तरह घर आया और गैर कानूनी तरिके से कटिया लगा कर बिजली की व्यवस्था कर गया , ज़ाते ज़ाते कह गया कि आप लोग बस बच्चे का ध्यान रखों बाकी कोई पूछे तो कह देना कि मुन्ना आया था .... #memory #unforgettablemoments #spreadloveandpositivity #HumanityFirst

Wednesday, March 23, 2022

Holdall

Hold All.... शायद पारम्परिक अन्दाज से समझा जाये तो यहीं अर्थ होगा कि जो सब कुछ अपने में संजो लें य़ा बांध लें , इस शब्द और इस कभी भी ना भूलने वाली अद्भूत चीज से मेरा परिचय मेरी नानी ने करवाया था , उनके वक़्त तो Holdall भी नहीं होता था वोह एक पुरानी दरी लें कर ,सारा समान उस में ही व्यवस्थित करके 2 मजबूत रस्सियों से ऐसे कस कर बांधती थी कि मजाल हैं कि समान एक इंच भी इधर से उधर हो जाये , दर्मियाने कद में कहाँ से वोह पवन सुती शक्ति आ जाती थी , सोचने का विषय हैं , नाना शुरु से रहें जोगिया मिजाज , सो उनका इन सब से कुछ लेना देना नहीं था , वोह भले और उनकी शिव भक्ती भली .... नानी ने पूरे परिवार को संभालते हुए घरेलू जुगाड़ वाले बिस्तरबंद के साथ ना जाने कहाँ कहाँ कि य़ात्रा कर डाली , वक़्त बिता और फिर यह ज़िम्मेदारी मेरे माता पिता ने संभाली , ट्रैन का सफर और बिस्तरबंद (Holdall) का चोली दामन का साथ .... हम 7 लोगो का समान , रजाई , ओढ़ने बिछाने के कपड़े , जूते के थेले और भी ना जाने कितने ही इधर उधर के समान उस विशालकाय होलडाल्ल में ऐसे समा ज़ाते थे जैसे ऊंट के मुंह में जीरा .. फिर Mummy से Green Signal पाते ही Daddy उसको बांधना शुरु करते थे , उसकी belts और daddy की मजबूत पकड़ उसको एक खास डमरू का सा रुप दे देती थी , ट्रैन के वक़्त पर ना आने पर वहीं हमारी विश्राम स्थली हुआ करती थी और ट्रैन के आ जाने पर हम सबको अपनी अपनी जगह बैठा य़ा लिटा कर कई बार 2 bearth के बीच उसी बिस्तरबंद को Daddy को अपना बिछौना बना कर लेटते हुए देखा हैं ..... खैर अब ना नाना नानी रहें और ना ही Daddy , बिस्तरबंद भी ना जाने कौन से अंधेरे कोने में खो गया , भगवान जाने उसका अस्तित्व अब हमारे घर में हैं भी कि नहीं .... हाँ पर उस में बंधी हमारी यादें आज भी टस्स से मस्स नहीं हुई हैं , अभी जीवन यात्रा जो जारी हैं ....❤️❤️

Friday, March 11, 2022

The Kashmir Files

 माना  जो कुछ भी घटित  हुआ  वोह बहुत ही भयावह , विभत्स और  हाड़  कपाने ने जैसा  था ....

अपनो  को अपने  सामने  मरता  देखना , तिल  तिल करके  उनको  तड़प  तड़प  कर  ज़ाते  हुए  देखना  कोई  कलेजे वाला  भी सहन नहीं कर  सकता ,

पर  जो बीत  गया  वोह बीत गया ,

लोग उस दुख को अपने  अपने  सीनों  में  दबा कर  अपनी  अपनी  ज़िन्दगी  में  आगे  बढ़  गये ,

आज  इतने  सालों  बाद  उस जख्म  को फिर क्यूँ  कुरेदा  जा  रहा  हैं ....

क्यूँ  नफरत  की  आग  को फिर से सुलगाया  जा  रहा  हैं , जो कुछ हमें  दर्द देगा क्यूँ  उसको  याद  दिलाया  जा  रहा  हैं ,

यह कौन सी  इंसानियत  हैं ....

कि  जो  ज़िल्लत  हम झेल्  चुके  हैं  उस  नर्क में  हमें  फिर  से धकेला जा  रहा  हैं ,

यह ज़ज्बातो  से खेलना  और  अपनी  जेब  चांदी  के  सिक्कों  से भरने  जैसा घिनोंना  खेल हैं ....

एक  भी  कारण  बतायें कि  हम The Kashmir Files क्यूँ  देखें ....