Thursday, March 31, 2022

"मसाला चाय "

"मसाला चाय ".... दिव्य प्रकाश द्वारा लिखी गई उनकी दूसरी पुस्तक ने मुझे मेरी युवावस्था के उस ड्योढ़ी पर लाकर खड़ा कर दिया जो मैं कब कि लांघ चुका था। अभी एक ही कहानी पढ़ी है ..... केवल बालिगों के लिये .... इस कहानी ने मुझे मेरे जीवन के 2 संस्मरण याद दिलाये .... 1,जब हम 3 मित्रो ने, जिनका नाम अमित नारायण एवं रवि किशन था ,अपने कॉलेज से भाग कर blue lagoon देखी थी ... अमित नारायण ,गहरे काले रंग का किशोरावस्था में कदम रखता बालक था जिस के बाल अमिताभ बच्चन cut में कटे हुए थे और वोह अमीनाबाद में कही रहता था ,रवि किशन हमारी कक्षा का सब से हॅसमुख लड़का था आज इतने सालो बाद भी उसका वही हँसता हुआ चेहरा आँखों के आगे आता हैं ... चूँकि हम तीनों शरीर से हट्टे कट्टे और कद में ऊँचे थे तब हम गेट पर पकड़ लिए जायेंगे ऐसी कोई भावना हमारे अंदर नहीं थी ,सो बस तय दिन के अनुसार हम तीनों महशूर सिनेमा घर बसंत जो कि हज़रत गंज में हुआ करता है,पहुँच गये ,हाँ इतना याद है कि सर्दियों के दिन थे और हम तीनो अपने अपने blue blazers कि शोभा बढ़ाते हुए टिकट खिड़की पर खड़े थे .... चुकी अमित हम सब में , से ज्यादा परिपक्व था और उस के लिए शायद यह पहला मौका भी नहीं था अतः हम दोनों उस के निर्देशानुसार ही आचरण कर रहे थे ,दिल में धुकधुकी तब तक रही जब तक हम टिकट लेकर उस काले गहरे सिनेमा हॉल के कक्ष में 3 काली परछाइयो से समां नहीं गये .... अब पिक्चर को देख कर 3 जवान होते लड़को ने कैसा महसूस किया होगा इस का वर्णन करना आवश्यक नहीं हैं ... दूसरा संस्मरण तब का है जब हम तीनो भाई बहन अपनी मम्मी के साथ ३ रसिक बुड्ढो कि कहानी फ़िल्म शौक़ीन देखने गए थे चुकी फ़िल्म बालिग थी और भीड़ कुछ ज्यादा ही थी अतः गेट कीपर ने सुरक्षा के मद्दे नज़र महिलाओ और लड़कियो से कहा कि वोह लोग गेट के अंदर वाले हॉल मैं आ जाये .... स्थिति तब हास्यपद हो गई जब हमारी मम्मी ने गेट कीपर से आग्रह किया कि चूकें हम दोनों भाई अभी बच्चें है इस लिए हम दोनों को भी अंदर आने दिया जाये ....

Wednesday, March 30, 2022

Behuman

मेरा भांजा , उम्र होगी लगभग 5-6 साल , बेहद प्यारा और खूबसूरत बच्चा , काली काली हिरन सी चमकती आँखे और सुन्दर रेशम जैसे बाल , खूब मज़े से खेल रहा था तभी हमारा परम प्रिय सेवक बहादुर , एक बेहद फुर्तीला और समझदार नेपाली जो ना जाने कितने ही वर्षों से हमारे घर की डोर संभाले हुए था , गर्म पानी का बर्तन लें कर निकला और पानी भी खौलता हुआ , और वोह भागते हुए बच्चे से टकरा गया और पूरा का पूरा पानी उस नाजुक देह को लाल करता हुआ, कई दिनों तक ना मिटने वाला दर्द और जख्म दे गया , पूरे देह पर फफोले से आ गये थे , जो कई साल रहें , उसका दर्द देखा नहीं जाता था तो मुंह छुपा कर रो लेता था , एक नामी Missionary स्कूल में पढ़ता था वोह , Exams चल रहे थे , Principal ने साफ इंकार कर दिया कि बिना exam दिये बच्चे को पास नहीं किया जा सकता , किस तरह उसको चादर से ढ़क कर मैं उसको लें कर गया था और कैसे उसकी दर्मियाने कद की टीचर उसको देख कर सहम गई थी आज भी याद हैं .... खैर इस सब के बीच एक अच्छा एहसास भी हुआ , तब विकास नगर में बिजली बहुत जाती थी , पूरी पूरी रात हाथ वाले पंखे क साथ गुज़र जाती थी , उस वक़्त inverter भी नहीं हुआ करता था , गर्मी के दिन और झुलसा हुआ बदन , बच्चा बेहद य़ातना और पीड़ा में था , बिजली हम सब से नाता तोड़ कर जा चुकी थी , खैर Power House वालो को सम्पर्क किया तो एक व्यक्ति ज़िसका नाम मुन्ना था और इस्लाम धर्म को मानने वाला था , रात के अंधेरे में किसी देवदूत की तरह घर आया और गैर कानूनी तरिके से कटिया लगा कर बिजली की व्यवस्था कर गया , ज़ाते ज़ाते कह गया कि आप लोग बस बच्चे का ध्यान रखों बाकी कोई पूछे तो कह देना कि मुन्ना आया था .... #memory #unforgettablemoments #spreadloveandpositivity #HumanityFirst

Wednesday, March 23, 2022

Holdall

Hold All.... शायद पारम्परिक अन्दाज से समझा जाये तो यहीं अर्थ होगा कि जो सब कुछ अपने में संजो लें य़ा बांध लें , इस शब्द और इस कभी भी ना भूलने वाली अद्भूत चीज से मेरा परिचय मेरी नानी ने करवाया था , उनके वक़्त तो Holdall भी नहीं होता था वोह एक पुरानी दरी लें कर ,सारा समान उस में ही व्यवस्थित करके 2 मजबूत रस्सियों से ऐसे कस कर बांधती थी कि मजाल हैं कि समान एक इंच भी इधर से उधर हो जाये , दर्मियाने कद में कहाँ से वोह पवन सुती शक्ति आ जाती थी , सोचने का विषय हैं , नाना शुरु से रहें जोगिया मिजाज , सो उनका इन सब से कुछ लेना देना नहीं था , वोह भले और उनकी शिव भक्ती भली .... नानी ने पूरे परिवार को संभालते हुए घरेलू जुगाड़ वाले बिस्तरबंद के साथ ना जाने कहाँ कहाँ कि य़ात्रा कर डाली , वक़्त बिता और फिर यह ज़िम्मेदारी मेरे माता पिता ने संभाली , ट्रैन का सफर और बिस्तरबंद (Holdall) का चोली दामन का साथ .... हम 7 लोगो का समान , रजाई , ओढ़ने बिछाने के कपड़े , जूते के थेले और भी ना जाने कितने ही इधर उधर के समान उस विशालकाय होलडाल्ल में ऐसे समा ज़ाते थे जैसे ऊंट के मुंह में जीरा .. फिर Mummy से Green Signal पाते ही Daddy उसको बांधना शुरु करते थे , उसकी belts और daddy की मजबूत पकड़ उसको एक खास डमरू का सा रुप दे देती थी , ट्रैन के वक़्त पर ना आने पर वहीं हमारी विश्राम स्थली हुआ करती थी और ट्रैन के आ जाने पर हम सबको अपनी अपनी जगह बैठा य़ा लिटा कर कई बार 2 bearth के बीच उसी बिस्तरबंद को Daddy को अपना बिछौना बना कर लेटते हुए देखा हैं ..... खैर अब ना नाना नानी रहें और ना ही Daddy , बिस्तरबंद भी ना जाने कौन से अंधेरे कोने में खो गया , भगवान जाने उसका अस्तित्व अब हमारे घर में हैं भी कि नहीं .... हाँ पर उस में बंधी हमारी यादें आज भी टस्स से मस्स नहीं हुई हैं , अभी जीवन यात्रा जो जारी हैं ....❤️❤️

Friday, March 11, 2022

The Kashmir Files

 माना  जो कुछ भी घटित  हुआ  वोह बहुत ही भयावह , विभत्स और  हाड़  कपाने ने जैसा  था ....

अपनो  को अपने  सामने  मरता  देखना , तिल  तिल करके  उनको  तड़प  तड़प  कर  ज़ाते  हुए  देखना  कोई  कलेजे वाला  भी सहन नहीं कर  सकता ,

पर  जो बीत  गया  वोह बीत गया ,

लोग उस दुख को अपने  अपने  सीनों  में  दबा कर  अपनी  अपनी  ज़िन्दगी  में  आगे  बढ़  गये ,

आज  इतने  सालों  बाद  उस जख्म  को फिर क्यूँ  कुरेदा  जा  रहा  हैं ....

क्यूँ  नफरत  की  आग  को फिर से सुलगाया  जा  रहा  हैं , जो कुछ हमें  दर्द देगा क्यूँ  उसको  याद  दिलाया  जा  रहा  हैं ,

यह कौन सी  इंसानियत  हैं ....

कि  जो  ज़िल्लत  हम झेल्  चुके  हैं  उस  नर्क में  हमें  फिर  से धकेला जा  रहा  हैं ,

यह ज़ज्बातो  से खेलना  और  अपनी  जेब  चांदी  के  सिक्कों  से भरने  जैसा घिनोंना  खेल हैं ....

एक  भी  कारण  बतायें कि  हम The Kashmir Files क्यूँ  देखें ....