Saturday, February 4, 2023

#worldcancerday2023

 #WorldCancerDay2023 

बहुत छोटा था तब में ,

शायद बात 1980 के करीब की होगी 

Mummy के चाचा जी  के बेटे ,

और हमारे निरांकार मामा ....

लम्बा पतला दुबला शरीर ,

सांवला रंग ,

तीखे  नाक नक्ष ...

गीत संगीत के दीवाने ,

एक  पुराना  गाना ,

तस्वीर बनाता हूँ , तस्वीर नहीं बनती ....

बड़े ही जतन से गाते थे ,

हमारे लखनऊ प्रवास के दौरान एक दिन मामाजी लखनऊ आये और चूँकी पिता जी , एक डॉक्टर थे , और मामा जी का  स्वास्थ ठीक नहीं था ,

अत: जांच के दौरान पता चला कि मामा जी को Cancer हैं और  उपचार  का  वक़्त निकल  गया हैं ....

यह थी इस  भीषड़  बीमारी से मेरी पहली मुलाकात ....

फिर  शुरू हुआ ईलाज  का  कभी ना खत्म होने वाला सफर ,सांवली देह काली हो  चुकी थी ,

मामा  जी  की पीड़ा कानो को भेद देती थी , एक अत्यंत सौमय व्यक्ति किस प्रकार तिल तिल कर के मौत के समीप जा रहा था ,

आज भी सोचता हूँ तो कांप सा जाता हूँ ....

खैर काल की गती को कौन रोक पाया हैं ,वोह वक़्त भी आ ही गया जब मामा जी अपने सारे भौतिक कष्टों से मुक्ती पा कर , उस परम पिता  में लीन हो गये ....

उनका प्रिये गाना जैसे  आज भी उनके अधूरे जीवन की कहानी सुनाता हुआ कह रहा हैं ....

तस्वीर बनाता हूँ ,

तस्वीर नहीं बनती ,

एक ख्वाब सा देखा हैं ,

ताबीर नहीं बनती .....