कहीं कुछ पढ़ा और Daddy फिर यादों का दरवाजा खट खटा गये ,
कहीं बाहर जाता तो जाने से पहले Daddy के पास आता ,
बूढी पड़ गई ज़र्जर काया को बाहों में लेता ,ढ़ीले ढ़ाले कुर्ते में उनके शरीर को ढूंढ पाना भी मुशकिल ही होता ....
खैर फिर भी उनको महसूस करता और धीरे से उनके कान के पास फुसफुसा कर कहता ,
Daddy, जा रहा हूँ अपना ध्यान रखियेगा और Mummy का कहना मानियेगा और हाँ , लड़ीयेगा नहीं ,
कभी समस्त प्रदेश का Director General of Medical & Health of Uttar Pradesh रहा व्यक्ति चुप चाप मेरी बात सुनता और सहमती में सर झुका कर मुझे आश्वासित कर देता कि वोह वैसा ही करेंगे जैसा मैने कहाँ हैं ....
खैर अब तो यादों और उस कुर्ते के अलावा कुछ रहा नहीं पर उस एहसास की गर्मी और अपनापन आज भी महसूस होता हैं ....
#memorydownlane