Sunday, November 20, 2022

Down memory lane


 बहुत दिनों  बाद  आज दिल कुछ उदास  सा हैं ,

यादें  घूमड़  रहीं  हैं ,

यूँ  ही आज  "सूई  धागा " हिन्दी  चलचित्र  देखा ,

एक Scene में  बेटा  बहुत ज्यादा  भावुक  हो कर  अपने  पिता  के गले लग जाता  हैं ,

बस यहीं  मैं  भी यादों  की हवेली का दरवाजा खोल  कर  भीतर  दाखिल  हो गया ....

यूँ  तो कभी याद नहीं  कि  Daddy ने मुझे गले लगाया  हो , पर  अपने  अंतिम  दिनों  में  जब वोह मेरे ज्यादा करीब  हो गये  थे , तो जब कभी भी मैँ  कहीं बाहर  जाता  तो उनका  जर्जर होता  ज़िस्म  अपनी  बांहो  में  भरता  और  उनको समझाता  कि  Daddy मैँ  जा  रहा हूँ ,

अपना  ध्यान  रखियेगा  और  Mummy की सारी  बातें  मानियेगा ,

किसी  अच्छे बच्चें  की तरह  वोह मेरी बांहो  में सिमट  जाते  और  सहमति में सर  झुका  कर , सर  नीचे  कर  लेते .....

आज  बस उस  पल का  एहसास  रह  गया  हैं I

Daddy जो नहीं रहें....

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