कुदरत का करिश्मा हैं या कुछ और ...
पेशे से चिकित्सक ,
पर पेड़ पौधों के बेहद करीब ....
कैसे किसकी cutting लगायें ,
खाते time कोई आम या पपिता मीठा निकल गया तो तुरंत वोह धरती की गोद में समा जाता था नये अंकुरण के लिए ...
मेरी इसी बात को लेकर उनसे मतभेद रहता था ....
मैं फूल का पौधा लगाता , कुछ वक़्त बाद देखता तो उसकी सबसे मोटी डंडी कटी हुई हैं ,
समझ जाता था कि यह काम किसका हैं ....
Daddy आपने फिर पेड़ की cutting की ...
बड़ा तो होने देते ....
एकदम मासूम बच्चे की तरह बोलते कि उनका झूठ उस मासूमियत में दब कर रह जाता ...
कौन सी cutting, मैनें तो देखी भी नहीं ....
और मैं सब कुछ जानते हुए भी चुप हो जाता ....
पपिते के एक बार 25 पेड़ लगा दिये हमारे आवास विकास वाले घर के दायेरे में ...
25 पेड़ ,
वोह भी पपिते के ..
घर हैं या पपिता पौधशाला ....
ठीक यहीं बोला था मैनें Mummy से ...
और सारे उखाड़ दिये थे , दिल को शांति मिली कि आज बदला पूरा हुआ.....
उनके प्रस्थान को 4 माह पूरे होने को आये .....
यूँ ही बागिचे में घूमते हुए एक गमले पर नज़र जाती हैं तो देखता हूँ कि एक सुन्दर सा पपिते का पौधा उग आया हैं और जैसे मुझे मुंह चिड़ा कर कह रहा हैं कि अब उखाड़ कर दिखाओ मुझे ...
No comments:
Post a Comment