Sunday, November 21, 2021

Daddy....

बहुत दिनों  बाद  आज दिल कुछ उदास  सा हैं ,
यादें  घूमड़  रहीं  हैं ,
यूँ  ही आज  "सूई  धागा " हिन्दी  चलचित्र  देखा ,
एक Scene में  बेटा  बहुत ज्यादा  भावुक  हो कर  अपने  पिता  के गले लग जाता  हैं ,
बस यहीं  मैं  भी यादों  की हवेली का दरवाजा खोल  कर  भीतर  दाखिल  हो गया ....
यूँ  तो कभी याद नहीं  कि  Daddy ने मुझे गले लगाया  हो , पर  अपने  अंतिम  दिनों  में  जब वोह मेरे ज्यादा करीब  हो गये  थे , तो जब कभी भी मैँ  कहीं बाहर  जाता  तो उनका  जर्जर होता  ज़िस्म  अपनी  बांहो  में  भरता  और  उनको समझाता  कि  Daddy मैँ  जा  रहा हूँ ,
अपना  ध्यान  रखियेगा  और  Mummy की सारी  बातें  मानियेगा ,
किसी  अच्छे बच्चें  की तरह  वोह मेरी बांहो  में सिमट  जाते  और  सहमति में सर  झुका  कर , सर  नीचे  कर  लेते .....
आज  बस उस  पल का  एहसास  रह  गया  हैं I
Daddy जो नहीं रहें ....

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