Saturday, December 4, 2021

आस पास देखता हूँ  तो हम सब 50+ की अवस्था  वाले  एक जैसी ही मानसिक  अवस्था  में नज़र  आते  हैं ,
सालों  पहले  जो तिनका  तिनका  जोड़  कर  एक आशियाना  बनाया  था  आज वोह धीरे  धीरे  बिखरता नज़र  आ रहा  हैं , उम्र  के साथ  स्वास्थ  अब कुछ ज्यादा ठीक  नहीं  रहता , सब  कुछ ही digital होता  जा  रहा  हैं , अब बूड़ा  तोता  कितना  राम  राम  बोलना  सिखेगा ,अभी  तो बच्चें  हैं  तो बहुत  कुछ काम  कर  देते  हैं , बच्चें  अपने  पंख  पसार  रहें  हैं , उनकी  अपनी  नई  मांजिले  हैं , ऊँची  उड़ान  हैं ....
पैसों  और  भविष्य  की चकाचौंध हैं ,
लखनऊ  उनके सपनों  का  शहर  नहीं  हैं ....
और  एक हम लोग हैं  जो लखनऊ से अपने  को अलग देख ही नहीं सकते ,
बच्चों  की तरक्की के रास्ते  में  रोड़ा  बनना  हमारा  निजी  स्वार्थ  होगा ,
वोह बाहर  जायेंगे  ही  और  जाना  भी चाहिए ....
फिर क्या  किया  जायें ,
समाधान  सरल  हैं ,
अपने  अपने  घर  और  दिल  के दरवाजे खोलिये , आस पास  के लोगों  से हाथ  नहीं दिल  मिलायें ,
और  फिर से एक कभी ना  बिखरने  वाला अपना  घर  बनायें ....

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