Sunday, May 8, 2022

वोह खत जो कभी लिखा ही नहीं .... किसको लिखता वोह सब जो मैँ चाहता तो था पर कभी हुआ ही नहीं , कौन था जो वोह सब समझता जो मैं लिखता , बिना मुझे समझाये बस मुझे समझता , वोह सब पढ़ता जो मैं केवल उसके लिए लिखता , सुनो , अगर मैं बोलता तो वोह बस सुनता .... अगर मैँ दिल खोलता तो वोह दिमाग नहीं खोलता .... अगर खत में मुस्कान होती तो वोह भी खिलखिलाता , और अगर आंसू होते तो वोह अपना कांधा देता .... पर यह सब बस ख्याल ही रहें , इसी लिए , यहीं वोह खत हैं जो मैनें कभी किसीको लिखा ही नहीं .....❤️❤️

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