वोह खत जो कभी लिखा ही नहीं ....
किसको लिखता वोह सब जो मैँ चाहता तो था पर कभी हुआ ही नहीं ,
कौन था जो वोह सब समझता जो मैं लिखता ,
बिना मुझे समझाये बस मुझे समझता ,
वोह सब पढ़ता जो मैं केवल उसके लिए लिखता ,
सुनो ,
अगर मैं बोलता तो वोह बस सुनता ....
अगर मैँ दिल खोलता तो वोह दिमाग नहीं खोलता ....
अगर खत में मुस्कान होती तो वोह भी खिलखिलाता ,
और अगर आंसू होते तो वोह अपना कांधा देता ....
पर यह सब बस ख्याल ही रहें ,
इसी लिए , यहीं वोह खत हैं जो मैनें कभी किसीको लिखा ही नहीं .....❤️❤️
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