Thursday, September 10, 2020

 जिस भय  के साथ  कई  साल जिया वोह अचानक  10 फरवरी 2020 को प्रात: 5.20 पर  खत्म  हो गया ,

भय  अपने  माता  पिता  की सांसों  को लें  कर ....

रोज सुबह  उठ  कर  देखता कि  पिता  जी के कमरे  का  दरवाजा खुला  हैं ,

light जली  हुई हैं  मतलब  daddy  उठ  गये  हैं ....

कभी ऐसा  नहीं देखता  तो पास  जा  कर देखता , उनकी  सांसों  को सुन  कर आश्वस्त हो जाता  कि daddy ठीक  हैं  और  सुबह  की  चाए  बनाने  का  वक़्त  और  Daddy को अवाज  दे  कर उठाने  का  वक़्त  हो गया  हैं .....

कितने  साल यहीं क्रम  दोहराता  रहा .....

और  खुद को उस  घड़ी  के  लिए  तैयार  करता  रहा जब जीवन  की सब से बड़ी परीक्षा  की घड़ी  से गुजरना था ....

चाह  कर  भी कभी यह हिम्मत  जुटा  नहीं पाया ,

फिर  ना  जाने  कैसे कहाँ  से इतनी  हिम्मत  आ  गई  कि Doctors  के  कहने  पर  कि We are Sorry....

एक आंसू  भी आँख  से नहीं निकला ....

दिमाग  सुन्न  हो चुका  था ....

बस किसी  मशीन की  तरह  सारा  काम  करता  गया ....

और Daddy को यूँ  ही सारे  विधि  विधान  निभाते  हुए  विदा  कर  दिया ....

भले  ही वोह देहिक  रुप  में  मेरे साथ  नहीं  हैं परंतु  आज  वोह पूर्ण रुप से मेरे  अंदर  समा  चुके  हैं ....

ताज्जुब  होता हैं  कि  कैसे मेरे हाथ , पैर,  मेरा बोलना , चलना और  भी  ना  जाने  क्या  क्या  बिल्कुल  उनके जैसा  होता जा  रहा है ....

इसी  के साथ  ही साथ  वोह  मुझे समझा  गये जीवन का शाश्वत  सत्य ...

म्रत्यु  अटल हैं ....

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