जिस भय के साथ कई साल जिया वोह अचानक 10 फरवरी 2020 को प्रात: 5.20 पर खत्म हो गया ,
भय अपने माता पिता की सांसों को लें कर ....
रोज सुबह उठ कर देखता कि पिता जी के कमरे का दरवाजा खुला हैं ,
light जली हुई हैं मतलब daddy उठ गये हैं ....
कभी ऐसा नहीं देखता तो पास जा कर देखता , उनकी सांसों को सुन कर आश्वस्त हो जाता कि daddy ठीक हैं और सुबह की चाए बनाने का वक़्त और Daddy को अवाज दे कर उठाने का वक़्त हो गया हैं .....
कितने साल यहीं क्रम दोहराता रहा .....
और खुद को उस घड़ी के लिए तैयार करता रहा जब जीवन की सब से बड़ी परीक्षा की घड़ी से गुजरना था ....
चाह कर भी कभी यह हिम्मत जुटा नहीं पाया ,
फिर ना जाने कैसे कहाँ से इतनी हिम्मत आ गई कि Doctors के कहने पर कि We are Sorry....
एक आंसू भी आँख से नहीं निकला ....
दिमाग सुन्न हो चुका था ....
बस किसी मशीन की तरह सारा काम करता गया ....
और Daddy को यूँ ही सारे विधि विधान निभाते हुए विदा कर दिया ....
भले ही वोह देहिक रुप में मेरे साथ नहीं हैं परंतु आज वोह पूर्ण रुप से मेरे अंदर समा चुके हैं ....
ताज्जुब होता हैं कि कैसे मेरे हाथ , पैर, मेरा बोलना , चलना और भी ना जाने क्या क्या बिल्कुल उनके जैसा होता जा रहा है ....
इसी के साथ ही साथ वोह मुझे समझा गये जीवन का शाश्वत सत्य ...
म्रत्यु अटल हैं ....
🥲
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