Saturday, March 6, 2021

BODMAS

बात हैं  शायद  1975 की ,
कक्षा  6 के हम विद्यार्थी  थे , मुरादाबाद  के  एक जाने  माने स्कूल  के ,
बड़े  बड़े  कमरे ,
किसी  बड़ी  पुरानी  हवेली सा  स्कूल , आगे  पीछे  बड़े  बड़े  मैदान  ज़िनसे  मेरा  कोई खास  वास्ता  नहीं  क्यूंकी  खेल  कूद  में  कभी  कोई रूची  ही नहीं  थी , zero period ज्यादातर पेट  दर्द  के  बहाने  के  साथ  क्लास  में  बैठे  बैठे  ही  खत्म  हो  जाता  था ,
खैर  असली  मुद्दे  पर  आते  हैं , पढ़ाई  लिखाई  में  कभी भी अववल  दर्जे के  तो हम रहे  नहीं , उस  पर  गणित  और  Science तो यमराज से भी भयानक  थे ,
परीक्षा  की घड़ी  सर  पर  थी ,
और  दिमाग  एकदम  सफा  चट्ट  था , पर्चा  गणित  का  जो  था ,
और  पाठ  था  BODMAS का ....
अब यह BODMAS मुझे  किसी  बोड़ाम  बिहारी  जैसा  लग  रहा  था , खैर  पढ़ाने  का  ज़िम्मा  पिता  जी को  सौपा  गया ,
उन्होने  भी नहीं  सोचा  होगा  कि  उनका  खुद  का  खून  बनिया  होते  हुए  भी  गणित  में  इतना  गुड़  गोबर होगा ,
पूरी  मेहनत  और  अथक  प्रयासों  से मुझे  समझाने  का  भगीरथी  प्रयास किया  गया ....
कई घंटो की  मेहनत  के  बाद  हम  एक विजयी  मुस्कान  के  साथ  पिता जी  की कैद  से आजाद  हुए  उनको  आशवस्त  करते  हुए  कि  कल  विजय  ध्वज  हम  ही लहरायेंगे ,
घोडे  बेच  कर  सोने  के  बाद  सुबह  हुई  और  हम दही  बताशा  खा  कर  पहुँच  गये  Examination Hall में ,
Confidence गजब का  था ,
अकड  के मारे  गर्दन  में  दर्द  होने  लगा  था ,
समयानुसार  पर्चा  मिला ,
चूकें  सब  आता  हैं  यह हम  मान  चुके  थे  और  नियत  वक़्त  के  बहुत पहले  ही  सारे  सवालो  के  जवाब  दे  कर , हम  घर  वापिस  आ  गये ,
पूरे  घर  में  अपनी  होशियारी  के  चर्चे आम  कर  दिये ,
खैर  कुछ दिनों  की  बादशाहत  एक दिन तो खत्म  होनी  ही  थी ,
नतीजा  निकला और  हमें  नतिजे  में  मिला  शतुर्मुर्ग के अंडे  से भी बड़ा  अंडा ,
हमारा  घमंड फर्श  पर  गिर  कर आखिरी  साँसे  लें  रहा था ,
और  पिता  जी  के आने  से पहले  छुपने  का  स्थान  सोचता  मैं  बिचारा  सोच  रहा था कि  बात  confidence तक  ही रहती  तो ठीक  रहता , बस  यह  Over कुछ ज्यादा  ही Over हो गया ....

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