22.03.2020,
नहीं जानता कि जो कुछ किया उसका क्या अर्थ था ,
व्यर्थ में एक भेड़ चाल का हिस्सा बना या कोई अर्थपूर्ण कार्य किया ,
पिता जी एक ऊँचे दर्जे के चिकित्सक थे ,
10.02.2020 को ही गोकुलाधाम को प्रस्थान कर गये थे ,
गोकुलाधाम इसलिये लिखा क्यूंकी वोह मथुरा निवासी थे हालाकि आजीवन उनकी आस्था महावीर बजरंग बली में ही रहीं ,
खैर घोषण के अनुसार मैनें अपना मन बना लिया था कि मैं भी थाली पीट पीट कर अपने पिता जी को याद करूँगा और हर उस चिकित्सक का सम्मान करूँगा जो कि Corona से बचाव के लिए हम सब की सेवा में अग्रसर हैं ,
दुखद था माँ को देखना , जो केवल मेरे कारण बाहर आयी और इस कार्य का एक हिस्सा बनी ,
🙈
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