माना जो कुछ भी घटित हुआ वोह बहुत ही भयावह , विभत्स और हाड़ कपाने ने जैसा था ....
अपनो को अपने सामने मरता देखना , तिल तिल करके उनको तड़प तड़प कर ज़ाते हुए देखना कोई कलेजे वाला भी सहन नहीं कर सकता ,
पर जो बीत गया वोह बीत गया ,
लोग उस दुख को अपने अपने सीनों में दबा कर अपनी अपनी ज़िन्दगी में आगे बढ़ गये ,
आज इतने सालों बाद उस जख्म को फिर क्यूँ कुरेदा जा रहा हैं ....
क्यूँ नफरत की आग को फिर से सुलगाया जा रहा हैं , जो कुछ हमें दर्द देगा क्यूँ उसको याद दिलाया जा रहा हैं ,
यह कौन सी इंसानियत हैं ....
कि जो ज़िल्लत हम झेल् चुके हैं उस नर्क में हमें फिर से धकेला जा रहा हैं ,
यह ज़ज्बातो से खेलना और अपनी जेब चांदी के सिक्कों से भरने जैसा घिनोंना खेल हैं ....
एक भी कारण बतायें कि हम The Kashmir Files क्यूँ देखें ....
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