यूँ तो मेरा जन्मदिन 12 july को होता हैँ ,
पर आज एक मित्र के जन्मदिन और उनकी post से कुछ याद आ गया तो वोह आप सब के संग साँझा करता हूँ ...
बात करीब 70 के दशक की होगी ,
मेरी अवस्था 6 - 7 साल की होगी ,
Daddy ज़िला फारुख्खाबाद के चिकित्सा विभाग के उच्चतम पद पर थे ,
बड़ा बंगला ,
सरकारी गाड़ी ,
नौकर चाकर से भरा पूरा हमारा घर ....
june के महीने से ही 12 july का इंतेजार शुरू हो जाता था ,
समस्त सूविधाओं के होते हुए भी मेहमानों के खान पान की व्यवस्था स्वयं Mummy ही करती थीं ,
एक से एक स्वादिष्ट व्यंजन , मीठा और ना जाने क्या क्या बनाती थी ,
थकना शब्द तो जैसे उनके शब्दकोश में था ही नहीं ,
पर मेरा बालमन इन सब से दूर , शाम को आने वाले उपहारों की गिनती और अनुमानों में ही खोया रहता था ....
शाम होते ही हमारा बड़ा सा बगीचा सज जाता था ,रंग बिरंगी कागज की झांडियो के साथ ,
अब इंतेजार था मेहमानों का ....
धीरे धीरे लोग आना शुरू हो चुके थे ,
सजे धजे ,
हंसी और चहल पहल का माहौल बन चुका था ,
पर यह क्या हर अंकल आंटी खाली हाथ आ रहे थे ,
कोई भी कुछ नहीं ला रहा था ,
हर आने वाले के साथ उम्मीद जागती पर खाली हाथ देख कर दिल मायूस हो जाता ....
इसी ऊह पोह में शाम निकल गई और केक काटने का समय हो गया ,
अब क्या केक काटना जब कुछ मिला ही नहीं ,
दिल बेहद उदास था बस आसूँ नहीं आये वोह अलग बात हैँ ....
छुरी उठा कर केक काटने ही वाला था तभी Daddy के Junior शायद उनका नाम Dr . Homdutt Gupta था , भारी भरकम शरीर के मालिक आगे आये और मेरा हाथ पकड़ कर , एक प्यारी सी हाथ घड़ी उस में बांध दी ....
मेरे जीवन की पहली हाथ घड़ी ,
सब Doctors की तरफ से एक प्यारा सा उपहार था ....
बाद में पता चला कि उस वक़्त उसकी कीमत ₹ 200/- के करीब थी ...
खैर उपहार उपहार होता हैँ ,
उसकी कीमत नहीं आंकी जानी चाहिए ....
बस उस दिन से आज तक मैनें घड़ी की चाल से अपनी चाल मिला ली और हो गया मैँ वक़्त का पाबन्द इंसान ....
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