यादें ...
बात 1985 की ,
महीना यहीं होगा , July का ...
Intermidiat की परीक्षा बस जैसे तैसे पास कर के ,
Graduation करने के लिए Lucknow University पहुचं गये अपनी लाल रंग की BSA SLR cycle पर ....
उस वक़्त ना तो कोई admission test होता था , ना ही चुनाव की कोई और प्रक्रिया ,
Simple सा एक form भरो और बस लिस्ट निकलने का कुछ दिनों का इंतेजार ....
खैर लिस्ट भी निकली और नाम भी आ गया ...
विषय मिले थे ..
Economics
Psychology
Ancient Indian History
General English
बस अब हर रोज का क्रम बंध गया ,
cycle से 8-10 km की य़ात्रा कर के घर से University तक जाना , shoulder cross bag में चन्द पुस्तक ज़िनका University में कुछ खास उपयोग होता नहीं था ...
बस एक block से दुसरे block , cycle stand ही बदला करते थे ...
Pg block में Economics की classes हुआ करती थी , जो कभी हुई ही नहीं ...
और पुरानी हवेली नुमा ईमारत में Ancient Indian History की ...
Teachers भी शायद इस विषय के लिए पुरतत्व विभाग वालों ने ही दिये थे ...
सब से ज्यादा मनोरांजक विषय था Psychology.....
Seperate Block, बढ़िया Teachers, कुछ अच्छे दोस्त और ढेर सारी गप्पे...
ज़िन्दगी के कुछ खट्टे और कुछ मीठे अनुभव हुए ,
रोज कुछ नए शब्द( गालियां ) सीखने को मिली ....
ज़िनका इस्तेमाल जीवन में कभी भी नहीं किया l
सब से अच्छा अनुभव था जीवन में पहली बार Tagore Library जाना और वहां कुछ वक़्त गुजारना ....
ऊँची छतो वाली वोह ईमारत बहुत ही सुन्दर थी l
खैर इन्ही यादों के साथ कब 2 साल निकल गये , पता ही नहीं चला ....
आज पता चल रहा हैं कि University की चयन प्रक्रिया अब अत्यंत जटिल हो गई हैं ..
अब यह समझ नहीं आ रहा कि शिक्षा का स्तर ऊँचा हुआ हैं य़ा यहां भी जनसंख्या की मार के कारण Admission की पंक्ती लम्बी हो गई हैं ....
खैर जो भी हैं ,
ज़िन्दगी सरल रहें तो ही अच्छी लगती हैं ....

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