Monday, March 22, 2021

20.03.2020

22.03.2020,
नहीं  जानता  कि  जो  कुछ  किया  उसका  क्या  अर्थ  था ,
व्यर्थ  में  एक  भेड़  चाल  का  हिस्सा  बना  या  कोई  अर्थपूर्ण  कार्य  किया ,
पिता  जी  एक ऊँचे  दर्जे के  चिकित्सक  थे ,
10.02.2020 को  ही  गोकुलाधाम  को  प्रस्थान  कर गये थे ,
गोकुलाधाम  इसलिये  लिखा  क्यूंकी  वोह  मथुरा निवासी थे  हालाकि  आजीवन  उनकी  आस्था  महावीर बजरंग बली  में  ही रहीं ,
खैर  घोषण  के  अनुसार  मैनें  अपना  मन  बना  लिया  था  कि  मैं  भी थाली  पीट  पीट  कर  अपने  पिता  जी  को याद करूँगा और  हर  उस  चिकित्सक  का  सम्मान  करूँगा जो  कि  Corona से बचाव  के लिए हम  सब  की  सेवा  में  अग्रसर  हैं ,
दुखद  था  माँ  को देखना , जो केवल मेरे  कारण  बाहर  आयी  और  इस  कार्य  का  एक हिस्सा  बनी ,
आँखो  में  आंसू  लिए , सूनी  सूनी  आँखों  से थाली  बजाती  रहीं  और  उनके  लिए  फीके  पड़  गये  नीले  अकाश  में  Daddy को  खोजती  रहीं .....

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