Monday, April 19, 2021

अभी किसी  मित्र  ने  यूँ  ही एक तस्वीर  भेज  दी , जहाँ  पूरा  परिवार  एक साथ  एक  ही  पलंग  पर  बैठा  हैं ....
शायद  हम  वहीं  कुछ बनाते  हैं जो  कुछ  हम  स्वयं  अनुभव  करते  हैं ,
बरसों  पहले  हम  भाई बहन  , माता  पिता  के साथ  यूँ  ही एक पलंग पर  ना  जाने  कितने  ही किस्से  कहानियां बुना  करते  थे ....
जाड़े  की सर्द  रातें  , सूती  छापेदार  लिहाफ , हम  पांच  और  मम्मी  का  जादूई स्टील  का  डिब्बा , मेवे  से भरा  हुआ ....
कब  खत्म  हो  जाता  था , पता  ही नहीं  चलता  था ,
कभी कभी यूँ  ही बिस्तर  में  घूसे  घूसे  सो जाता  था  और  मम्मी  गर्म गर्म  खाना  सोते  सोते  ही खिला  देती  थी पर  सोते  सोते  भी जीभ  पर  सारे  स्वाद  रहते  थे  कि  अगला  कौर  काहे  से खाना  हैं ....
Daddy का  tour से वापिस  आना  और  य़ात्रा  का  लेखा  जोखा  खुलना  भी बिस्तर  पर  ही हुआ  करता  था ,
खैर  किस्से  तो बहुत  हैं ,
पलंग  भी  हैं ...
बस  अब  Daddy नहीं  हैं ....

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