Tuesday, April 27, 2021

सिर्फ  एक कॉल ....
अवसाद और  भय  का  माहौल  हैं ,
अफरा  तफरी और  ज़िन्दगी  जी  लेने  की जाद्दो  जहद चल रहीं हैं ,
अंजाना  डर  हमारे  दिल  और  दिमाग  पर  छाया  हुआ  हैं ,
विपरित  परिस्थितियों  में  हमें  क्या  करना  होगा  क्या  नहीं , इसी  में  दिमाग  ऊलझा  हुआ  हैं ,
हम खुद से ज्यादा  अपने  परिवार  के लिए आशंकित  हैं  खास  तौर  से अगर  कोई बुजुर्ग आपके  घर पर  हैं ....
दिमाग  इसी  माथापच्ची  में  थक  कर चूर  हो चुका  हैं ,
आप  अवसाद  में  घिरे  बिस्तर  पर  हैं , आधी  रात  हो चुकी  हैं , नींद  का  एक कतरा  भी आँखों  में  नहीं  हैं ....
आप  यूँ  ही कुछ  लिख कर अपने  मित्रों  के  एक WhatsApp Group में  डाल  देते हैं ....
और  यकायक  आपके  फ़ोन  की घंटी  घन घना  कर  बजती हैं ...
आप  एक ऐसा  नाम  देखते  हैं  ज़िसकी  आपको  उम्मीद  नहीं  होती ,
call करने वाला  बेहद  प्यार और  भरोसे के  साथ  आपको  अपने  होने  का  एहसास  कराता हैं  और  आशवस्त  करता  हैं कि  वोह आपके साथ हैं ....
बस  इसी  विश्वास  के दो  मीठे  बोल किसी औषिधी का  सा  काम  करते  हैं  और  आप  चैन  की नींद  सो  जाते  हैं ....
इस  वक़्त  दुरियां  खत्म  करें ,
मित्रों  के  करीब  आये ,
घर  ना  जा  कर  केवल  फ़ोन  पर  ही अपने  होने  का  एहसास  करायें ,
इस  मुशकिल  वक़्त  में  यहीं  सब  से बड़ी  Oxygen होगी  उनके  लिए ...
(व्यक्तिगत  अनुभव )

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