Sunday, July 26, 2020

कई हफ्ते नहीं शायद कई महिनों  दिल को समझाया ,रूठे  साथी की तरह मनाया ,  कहा कि बस 20 मिनट की ही तो बात है ,मान जाओ न Please.....
खैर इतनी मान मनौअल के बाद मेरा दिल राज़ी हुआ ,सुबह सुबह Morning walk पर जाने के लिये ....
हालांकि कोई भी ऐसा EXAMPLE मुझे नहीं दीख रहा था जिस  देख कर कह सकूँ कि  वह इस ने तो कमाल कर दिया ....
क्या कसा  हुआ बदन हो गया इस का ...
दिख रहे थे तो वही थुल थुल लटकते हुए पेट ,हांफती हुई साँसे ,गिरती पड़ती भागती हुई जर्जर इमारतें ....
हां यह अवश्य था की मेरे कलाकार मन को इन सब के बीच में से चुन कर  निकलने को बहुत कुछ मिला ...
जहाँ कुछ जवान जोड़े रात की खुमारी आँखों लिए और हाथ में हाथ लिए ,खरामा खरामा घुमते टहलते नज़र आये वही अधेड़ अवस्था के जोड़े सब से ज्यादा हास्यास्पद थे ....
बस कहने को संग थे पर शौहर अपनी बीबी की अपेक्षा दूसरे की बीबी के ज्यादा नज़दीक चल रहा था पर  हां यह जरूर था की बीच बीच में  मुड़ कर  यह जरूर देख लेता था की बीबी आ रही है की नहीं ....अब शायद इस का कारण यह   भी हो सकता है की वह बीबी की दूरी  नाप कर अपनी नज़दीकियां बढ़ाना चाह रहा हो ....
कुछ भी हो सकता है ....इस उम्र की मर्दजात बहुत ही कमीनी हो जाती है। 
परन्तु सब से सुखद अहसास था उन चमकीली सफ़ेद रेशम से लहलहाते बालो के बीच में  से झांकती हुई उन पवित्र झुर्रियों को देखने का जो आज भी हाथ में  हाथ पकड़े एक दूसरे का सहारा बने जीवन पथ की दुर्गम राहों  पर चलते जा रहे थे , उनके चेहरों की दिव्य मुस्कान सुबह को और भी सुरमई बना रही थी , अपने आप को मैंने धन्यवाद दिया की अगर मैं अपने दिल को न मनाता तब शायद आज इस सुख से वंचित रह जाता ,हां पर  इन्ही सब बातो के बीच एक बात समझ मैं नहीं आई की यह MORNING WALK पर  निकले हुए UNCLE लोग अपने हाथों में हर  आकर और प्रकार के डंडे क्यों रखते है......

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