मेरी कच्ची पक्की कलम आज कच्ची ही रह जायेगी अगर मैनें Daddy के लिए कुछ नहीं लिखा ,
पेशे से डॉक्टर,सरकारी महाकमे में उच्च पदासीन ,
पर ना जाने क्यूँ हमारी कभी बनी नहीं ,
विचारों का मतभेद हमेशा रहा ....
उनकी easy going life style कभी समझ नहीं आया हालाकिँ कभी कोई काम pending रहा हो उनका ऐसा याद भी नहीं ....
Office जाते थे अपने पसंदिदा सफारी सुट में ,और सार्दियों में mummy बड़े प्यार से कोई प्यारा सा फूल सजा देती थी उनके coat पर ,
शायद यह पेड़ पौधों का प्रेम ,फूल पत्ती से लगाव उनके ज़रिये ही मेरे अंदर आया हैँ ,
एक से एक गुलाब की cutting बांधा करते थे ,
खाने के भी बेहद शौकीन ,
मथुरा के हैँ तो पक्के खाने के बेहद शौकीन हैँ ,
आज भी मीठा और पूरी के लिए शौक वैसा ही हैँ ,
आज 90 साल की अवस्था में जो व्यक्ति पूरा उत्तर प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था संभालता था , खुद अपने को नहीं संभाल पा रहा .....
छोटी छोटी बातें भूल जाते हैँ ,
जब कई कई बार बताने के बाद भी नहीं समझ पाते तो कहीं किसी diary में लिखने की कोशिश करते हैँ ,
एक आँख में रोशनी नहीं रही ,
Diabetic भी हैँ ,
Blood pressure भी high रहता हैँ पर सब से ज्यादा परेशान रहते हैँ पेट से ....
किस किस दिन Laxative मिलेगा यह अच्छे से याद रहता हैँ ....
जैसे किसी बच्चे को मनचाही कोई खट्टी मीठी गोली मिलनी हो ....
विगत कुछ वर्षों से उनको देखने का ज़िम्मा मेरा हैँ ,
आश्चर्य हैँ कि जो व्यक्ति कभी किसी की नहीं सुनता था आज वोह इतना सीधा और सरल हो गया कि मेरी एक आवाज उनको बता देती हैँ कि क्या करना हैँ क्या नहीं ,
वास्ताव में बुड़ा होने के साथ साथ आदमी बच्चा ही हो जाता हैँ और रिश्ते स्वत : ही बदल जाते हैँ ...
बाप बच्चा और बच्चा बाप हो जाता हैँ ....
यह लेख कभी भी खत्म नहीं होगा इतना कुछ हैँ लिखने को पर कब तक लिखूँगा ....
बस यह जान लिजिये कि अगर घर में कोई बुजुर्ग हैँ तो उनको किसी विरासात की तरह संभाल कर तिजोरी में रखें ,
ना जाने कब यह अमानत आपके हाथ से निकल जायेगी और आप रह जायेंगे खाली और रीते हाथ....
Happy Father's Day
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