31 मार्च 1957,
जब Daddy , Mummy को देखने के लिए गये , अपने पिता जी एवं बड़े भाई के साथ ....
आज मम्मी ने यूँ ही अपने यादों का पिटारा हम सब के सम्मुख खोल दिया ,
चूकें मम्मी नाना नानी की एकलौती संतान हैं , तब मम्मी को शादी के लिए दिखाने ले जाते वक़्त नाना ने गिनती 3 को अशुभ मानते हुए अपने एक नौकर को भी साथ ले लिया और जा पहुचें दिल्ली के किसी होटल ताज में ...
यह 5 सितारा वाला होटल ताज ना हो कर कोई यूँ ही नाम भर का होटल ताज था ...
ताज्जुब होता हैं कि कैसे मम्मी को एक एक बात आज तक याद हैं इतने साल गुजर जाने के बाद भी ....
खैर देखने दिखाने का पाराम्परिक रस्म हुई ,
इसी बीच daddy और mummy को बात करने का मौका मिला और Daddy ने डॉक्टर होने के नाते Mummy से पूछा कि क्या कभी चेहरे के मुहासों का इलाज नहीं कराया ....
Mummy ने भी तापाक से नहले पर दहला मारा और बोला कि आप तो डॉक्टर हैं आप ही कुछ बतायें ....
Daddy ने एक गहरी नज़र Mummy पर डालते हुए कहा कि बाद में जरूर बतायेंगे ....
इसी जरूर बतायेंगे को Mummy ने सहमती मानते हुए शर्मा कर अपनी नजरें झुका ली ....
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