Sunday, July 26, 2020

दिल  आज  चुप चाप  ही रो पड़ा जब  माँ  ने  कहा  कि  बेटा  अल्मारी में कहीं  कुछ  टंगा  हुआ  हैँ  वोह मेरे जाने  के बाद  तुम  लोग आपस  में  बांट  लेना ,
कितनी  तकलीफ  हुई  मुझे  यह सुन  कर पर मैने  जाहिर नहीं  की ,
क्यूँ  हम  लोग आजकल  धन  दौलत  को  इतनी  तारजीह  देने  लगे  हैँ कि  उनके  आगे  माँ  बाप  का  साथ  और आशीर्वाद  भी  कम  लगने  लगता  हैँ ....
क्या  करेंगे  इन  ऐश ओ  आराम  का  जब परिवार  ही नहीं  होगा , माँ  की गोद  और बाप  का  सर  पर  हाथ नहीं होगा ....
चाह  कर  भी आज  हम  अपने  माँ  बाप  को  वोह नहीं दे  पाते जो कभी बचपन  में  हमें  यूँ  ही  बिन  बोले  मिल  जाया  करता  था ....
सच  में  हम  दिल  दिमाग  और जेब  से कितने रीते  हो गये  हैँ ....

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