दिल आज चुप चाप ही रो पड़ा जब माँ ने कहा कि बेटा अल्मारी में कहीं कुछ टंगा हुआ हैँ वोह मेरे जाने के बाद तुम लोग आपस में बांट लेना ,
कितनी तकलीफ हुई मुझे यह सुन कर पर मैने जाहिर नहीं की ,
क्यूँ हम लोग आजकल धन दौलत को इतनी तारजीह देने लगे हैँ कि उनके आगे माँ बाप का साथ और आशीर्वाद भी कम लगने लगता हैँ ....
क्या करेंगे इन ऐश ओ आराम का जब परिवार ही नहीं होगा , माँ की गोद और बाप का सर पर हाथ नहीं होगा ....
चाह कर भी आज हम अपने माँ बाप को वोह नहीं दे पाते जो कभी बचपन में हमें यूँ ही बिन बोले मिल जाया करता था ....
सच में हम दिल दिमाग और जेब से कितने रीते हो गये हैँ ....
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