बात 2009 दिसंबर की हैं ,
पहला ह्रदयघात हुआ था मुझे और मैं lifeline hospital के ICU में भरती था ....
ICU का दम घोटू माहौल ,और ना जाने वहां घड़ी क्यूँ नहीं होती ...
वक़्त का पता ही नहीं चलता ....
ठंडे सफेद बिस्तर और भी खौफनाक लगते हैं ....
खैर दीवारों से बात करके मैं अपने दिन निकाल रहा था कि तभी जोरदार आवाज के साथ ICU का दरवाजा खुला , और लोगों का ज़त्था पूरे खाली कमरे में भर गया ...
शांत माहौल रूदन में बदल गया ...
एक दादा जी भरती हुए थे ,
सीने का दर्द ले कर ....
उम्र देखते हुए नाते रिश्ते के लोगों ने समझा कि बेला आ गई ,
बहुओं ने सर ढक कर चिर सुहागन होने का आशीर्वाद मांगा ...
नाती पोतों ने फेसबुक के लिए फोटो खीचें ....
मसला इतना दुखद लगा कि मुझ से देखा नहीं गया और मैनें खुद को परदों के पीछे छिपा लिया ....
आवाजें फिर भी आती रही ...
दादा जी पूरी तरह से म्रत्यु श्यया पर थे ....
तभी दादा जी से पूछा गया कि कुछ खायेंगे आप ...
दादा जी ने गर्म दूध में डबल रोटी डाल कर खाने की इच्छा जताई ...
आनन फानन उनकी इच्छा पूरी की गई ....
सीने का दर्द अभी भी बना हुआ था ....
कटोरा भर खत्म होते होते एक जोरदार आवाज से कमरा गूंज गया ....
रोना अब हसीं में बदल चुका था ....
पता चला कि दादा जी की हवा खुल गई .....
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