Sunday, July 26, 2020

कल रात लखनऊ बुक क्लब की मीटिंग से लौटने के बाद ...
 मैंने  यूँ ही अचानक अपनी पत्नी से जब पूछा कि अगर अगला जनम है तब वोह क्या दोबारा स्त्री बनना चाहेगी ...
उसका उतर था ...नहीं।
क्यूंकि वोह उन सब सीमाओं  को लाघना चाहती है जो स्त्रियों के लिए ही जैसे बनी है ....
मेरे पूछने पर  की ऐसा कौन सा काम है जो आज महिलाये नहीं कर रही है ....
कनक जी की तरह उस का भी जवाब था कि  रात को बाहर अकेले नहीं जा सकते ....
चाय/कॉफ़ी पीने .
हम शादी शुदा मर्दों मैं भी शादी के बाद कहाँ यह हिम्मत बचती है की बिना कोई बहाना  बनाये यूँ ही आवारगी के लिए चंद कदम भी निकल जाए ....
जब उस ने यहीं सवाल मेरे से किया तब मैं तो जैसे तेयार  बैठा था अपने जवाबो की पोटली बांधे हुए ...
बिना 1 भी पल गवाए मैंने गांठे खोलनी शुरू कर दी ...
हाँ ..
मैं स्त्री बनना चाहूँगा...
पत्नी को हैरत हुई ...ऐसा क्यूँ ..
कारन था मेरे पास .....
मैं मातृत्व के उस सुख को भोगना चाहता हू जिस को प्रभु के समक्ष समझा जाता है ...
मैं उस सुख को जीना चाहता हूँ  जो 1 नए जीवन को धरती पर लाने  का होता है ....
कैसी होती है वोह विलक्षण अनुभूति इस का आभास करना चाहता  हूँ ....
हाँ , मैं  पूरा जीवन जीना चाहता हूँ.....

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