सवाल यह नहीं कि हमने अपने माता पिता का कितना ध्यान रखा ,
कैसे एक बच्चे की तरह उनको देखा और पाला पोसा ....
सवाल यह हैं कि हम को कौन देखेगा ,
क्या हमारे बच्चे कर पायेंगे यह ....
भयावाह हैं सोचना भी ....
बच्चों को संस्कार दिजिये महंगे cell phones नहीं ....
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