Sunday, July 26, 2020

आज कुछ ऐसा लिखने  वाला  हूँ  जो मेरा विषय  कतई नहीं  रहा ,
परंतु  चूकीं  मैँ  भी इस  वर्षों  पुरानी  कला  का  एक छोटा  सा हिस्सा  हूँ  इसलिये  अगर  नहीं  लिखूँगा  तो वोह भी  नाइंसाफी  होगी  और चुप  रहना  वैसे भी  मेरी  आदत में  नहीं  हैँ ....
यहाँ  हम  बात  कर  रहे वर्षों  पुरानी  कला  बोंसाई  की ,
जहाँ  पर  कुछ खास  किस्म  के पौधो  को  काट छाट कर एक मनचाहा आकार  दे  दिया  जाता  हैँ  और  एक पेड़  के रुप  में  आने  वाले  कई  सालों  तक  यूँ  ही  पनापने  दिया  जाता  हैँ  पर  इस  पूरी  प्रक्रीया में  पेड़  का  पूरा  ध्यान  रखा  जाता  हैँ ,
उसकी  ज़रूरी  कांट  छाट  से लेकर उसके  खान  पान  तक  का ....
cutting करने  के बाद  उसके  घाव  पर  मारहम भी  लगाया  जाता  हैँ ,
मौसम  के अनुसार पेड़  की  cutting  की जाती  हैँ ,
  cutting  भी उतनी  ही जितनी  हम  स्वयं अपने  बालों  य़ा नाखूनों  की  करते  हैँ  स्वयं  को  सुन्दर  बनाने  के लिए ,
इस  खास  कला  के लिए कुछ  खास  किस्म  के पौधो  का  ही चुनाव  किया  जाता हैँ  बाकी  की  कलाकारी इस  कला  से जुडे  कलाकारों के  दिमाग  का खेल  हैँ ....
भगवान  बुद्ध  एवं  उनके  शिष्यों  द्वारा  शुरू  की  गई  इस  कला  का  गहरायी से  अध्यन  कीजिये , पूर्ण  विश्वास हैँ  कि  आप  भी  इस  कला  के सम्मोह  से अछूते  नहीं  रह  पायेंगे ....

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