आज कुछ ऐसा लिखने वाला हूँ जो मेरा विषय कतई नहीं रहा ,
परंतु चूकीं मैँ भी इस वर्षों पुरानी कला का एक छोटा सा हिस्सा हूँ इसलिये अगर नहीं लिखूँगा तो वोह भी नाइंसाफी होगी और चुप रहना वैसे भी मेरी आदत में नहीं हैँ ....
यहाँ हम बात कर रहे वर्षों पुरानी कला बोंसाई की ,
जहाँ पर कुछ खास किस्म के पौधो को काट छाट कर एक मनचाहा आकार दे दिया जाता हैँ और एक पेड़ के रुप में आने वाले कई सालों तक यूँ ही पनापने दिया जाता हैँ पर इस पूरी प्रक्रीया में पेड़ का पूरा ध्यान रखा जाता हैँ ,
उसकी ज़रूरी कांट छाट से लेकर उसके खान पान तक का ....
cutting करने के बाद उसके घाव पर मारहम भी लगाया जाता हैँ ,
मौसम के अनुसार पेड़ की cutting की जाती हैँ ,
cutting भी उतनी ही जितनी हम स्वयं अपने बालों य़ा नाखूनों की करते हैँ स्वयं को सुन्दर बनाने के लिए ,
इस खास कला के लिए कुछ खास किस्म के पौधो का ही चुनाव किया जाता हैँ बाकी की कलाकारी इस कला से जुडे कलाकारों के दिमाग का खेल हैँ ....
भगवान बुद्ध एवं उनके शिष्यों द्वारा शुरू की गई इस कला का गहरायी से अध्यन कीजिये , पूर्ण विश्वास हैँ कि आप भी इस कला के सम्मोह से अछूते नहीं रह पायेंगे ....
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