Sunday, July 26, 2020

चलिये  आज  कुछ  लिख  ही  डालता  हूँ ,
आज  जब  यूँ  ही  अपने  परम  सखा  बाल  हनुमान के  चित्र  को  साँझा  किया  आप  सब  के  साथ  तो  ढ़ेरो  प्यार  और  शुभकामनायें  आप  सब  से मिली ...
मन  प्रसन्न  हुआ ....
तभी  किसी  मित्र  ने सवाल  किया  कि  यह  कौन  सा  प्रकरन हैं ऐसा  तो कभी  देखा  य़ा  सुना  नहीं ....
तो  जवाब  यह  हैं  कि  शायद  भगवान  के  बाद  हम  कलाकार  ही  हैं जो  भावनाओँ  और  चिंतन को  एक मूर्त  रुप  प्रदान  कर  देते  हैं ....
जो  कुछ आपने  नहीं  सोचा  होता  जब  वही  आपके  सामने  होता  हैं  तो आप  भी  आल्हादित  हो  जाते  हैं ,
फिर  उनका  सवाल  था  कि  यह  आप  केवल  हिन्दू  देवी  य़ा  देवता  के  संग  ही  कर  सकते  हैं  क्यूंकी  आप  जानते  हैं  कि  हम  हिन्दू  कुछ  बोलेंगे  नहीं ,
तो इस  पर यह  कहना  चाहूँगा  कि  आप  अपनी  मन  की  अपने  मित्र  के  साथ  ही  करते  हैं  क्यूंकी  वोह आपको  समझता  हैं ....
अजनबी के  संग  कौन  दिल्लगी  करता  हैं ....
फिर भी  अगर  कभी  ऐसा  कोई विचार  दिल  में  आया  और  मर्यादित हुआ  तो उसको  चित्रित  करने  से  चूकुंगा  नहीं ....
बाकी  समय  जवाब  देगा ....
एक  बार फिर  से  आप  सब  को  ढेर  सारा  प्यार  और  आशीर्वाद .....

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