बात उन दिनों की हैं जब लोगों के मिजाज़ और मौसम के तेवर इतने गर्म नहीं हुआ करते थे ,
स्कूल बंद होते ही , नानी के घर जाना अनिवार्य हुआ करता था और शायद यहीं एक काम ऐसा होता था ज़िसका थोपा जाना हमको बुरा नहीं लगता था ,
ट्रैन का वोह धूल भरा सफर ,
अजनबी पसीने की गंध ,
मिट्टी की सुराही का शीतल जल और पूरी आलू की सुगंध , वहीं हमारा पूरा संसार हुआ करती थीं ,
अरे हाँ ,
Station पहुचं कर वोह वजन लेने वाली machine पर ठीठकना और Mummy की तरफ देख कर वोह 10 पैसे के सिक्के के लिए अर्जी लगाना आज भी याद हैं ,
रास्ते में पढ़ने के लिए चन्दामामा से ले कर चाचा चौधरी तक ना जाने कितनी ही किताबें ले लेना ,
बहन भाई से लड़ कर खिडकी के पास वाली Seat लेना , और द्रूत गती से भागते हुए पेडों को देखना , अपना ही एक अलग आनन्द हुआ करता था ....
Train के plateform पर पहूचने पर नाना को कभी खोजना नहीं पड़ा , सफेद चिट्टे कुरते पजामे में वोह हमेशा इंतेजार करते हुए मिला करते थे ,
Station से नानी के घर तक का सफर रिक्शे में नाना के संग बात करते कैसे कट जाता था , कभी पता ही नहीं चला .....
घर नाना का होते हुए भी हमेशा नानी का घर कैसे कहलाया जाता हैं यह समझ नहीं आया ....
फिर शुरू होता था नानी का लाड़ प्यार ....
ज़िसकी कोई सीमा नहीं होती थी ,
माँ भी वहां जाकर एकदम शांत हो जाती थी ,
देशी घी में ना जाने नानी कौन से प्यार का मसाला डाल कर छोंक लगाती थी कि कब खाना खत्म हुआ , पता ही नहीं चलता था ....
रात होते ही घर की छत पर बान से बुनी हुई चारपाई डाली जाती थीं और उन पर बिछती थी सूती सफेद च्ददर ,
रात होते होते चाँद की रोशनी उन चादारों को भी एकदम शीतल और आरामदेह कर देती थी ,
फिर लेट कर तारों को गिनने का सिलसिला शुरू होता था जो सुबह होने तक चलता था ....
बस इनही खेलों में 15-20 दिन कैसे निकल जाते थे पता ही नहीं चलता था ,
कठिन होता था , नानी को रोता हुआ छोड़ कर आना , वोह उनकी ठोडी पर रोते समय 10 पैसे का सिक्का सा छप जाना और उनकी भरी हुई आँखो को देखना , उफ़ नहीं याद करना चाहता मैँ ....
उनके आँचल की बिना किसी इत्र से महकती हुई खुशबू आज भी याद हैं ....
आज 53 साल की अवस्था में ना नाना रहें ना नानी ,
नानिहाल भी खण्डार हो चला एक पुराना मकान हो गया हैं ज़िसका अस्तित्व भी बस अब कुछ दिन का ही शेष हैं ....
पर आज भी याद हैं नानिहाल में गुजरे हुए वोह दिन ......
No comments:
Post a Comment