Sunday, July 26, 2020

आज एक  अनोखा  एहसास  हुआ ....
कभी  ध्यान  किया  हैं  आपने  अपने  घर  के  बुजर्गो  को  देख  कर ,
वोह  भविष्य  की  चिंता  ना  कर  के  अपने  भूतकाल  के  किस्से  या  अपनी  स्मरतियो में बसे  कुछ  नाम  और  दास्तां  सुनाते  हैं ....
और  अपने  पोपले मुंह  में  ना  जाने कितने  शब्द  छुपा  कर  रखते  हैं  और  धीरे  धीरे  एक  एक शब्द  निकाल  कर  उसकी  माला  सी  बुनते  चले  जाते  हैं ...
वही  हम  इस  पीढी  के  ना  घर  के  ना  घाट  के  समान,
  ना  वर्तमान में जी  पाते  हैं  और  भविष्य की सोच  सोच  कर  वैसे  ही  वक़्त  के  पहले  ही  मुंह  झूरियों  से  भर  लेते  हैं ....
इस  लिये  ही  कहते  हैं  बुजूर्ग  आज  भी हमारे  आँगन के  वोह  बरगद के  पेड़ हैं  जिनकी  छाव  में  पल  भर  बैठ कर  हम  अपने  जानकारी  और  ध्यान  में  इजाफा  कर  सकते  हैं ...
आशा  हैं  कि  आप  इशारा  समझ  गए  होंगे ....

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